अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व उप निदेशक माइकल मोरेल ने हाफिज की रिहाई की निंदा करते हुए कहा कि उसके हाथ खून से सने हैं। वह पाकिस्तान की मुख्यधारा की राजनीति में कट्टरवाद को लाना चाहता है।
माइकल ने ट्वीट में लिखा, सईद आतंकी है और लश्कर ए तैयबा के साथ काम कर चुका है। अमेरिका ने हाफिज की रिहाई पर गहरी चिंता जताते हुए उसे फिर से सलाखों के पीछे भेजने को कहा है।
ज्ञात हो कि मुंबई हमले में 166 लोग मारे गए थे, जिसमें से 6 अमेरिकी नागरिक थे। उधर, अमेरिकी विशेषज्ञ क्रिस्टीन फेयर ने ट्वीट किया है, जमात उल दावा आतंकी संगठन आईएसआईएस से नहीं जुड़ा है....ये क्या धोखेबाजी है। वहीं अमेरिका के एनबीसी न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में आतंकी की रिहाई से अमेरिका और पाकिस्तान के संबंध बिगड़ने की आशंका जताई है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा, दशकों से पाकिस्तान ने लश्कर ए ताइबा जैसे समूहों को संपत्ति की तरह देखा है क्योंकि ये कश्मीर में भारतीय सैनिकों को निशाना बनाते हैं।
यहां तक पाकिस्तान तालिबान भी उनके लिए संपत्ति रहे हैं, जबकि वे सीधे देश को चुनौती दे रहे हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान को सख्त संदेश देने की जगह अमेरिका भी मिश्रित प्रतिक्रिया दे रहा है। द वाशिंगटन एग्जामिनर ने लिखा कि ट्रंप प्रशासन को भारत के साथ मिलकर हाफिज को पकड़ना या मार डाला चाहिए।