हॉलिवुड से बॉलिवुड में दस्तक देने वाला मीटू अभियान और भी कई क्षेत्रों तक पहुंच गया। ऐसे में महिलाओं ने अपने साथ हुए शोषण के खिलाफ आवाज उठाई। कई मामलों में आरोपी ने ये भी कहा कि उसपर गलत आरोप लगाए गए हैं। हो सकता है किसी मामले में ऐसा हुआ भी हो। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि सभी महिलाओं को इसके लिए सजा दी जाए। उनसे गलत व्यवहार किया जाए। ऐसा ही कुछ हो रहा है अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के वॉल स्ट्रीट में।
महिलाओं से पुरुष कर्मी जितना हो सके उतनी दूरी बना रहे हैं। महिला कर्मियों के साथ पुरुष कर्मी डिनर करने और साथ में फ्लाइट में बैठने से बच रहे हैं। इसके अलावा अगर ऑफिस के काम से किसी महिला के साथ किसी अन्य देश या जगह पर जाना हो तो होटल में कमरे भी अलग अलग फ्लोर पर लिए जा रहे हैं। एक के बाद एक मीटिंग नहीं की जा रहीं। केवल इतना ही नहीं वह महिलाओं को नौकरी देने से भी बच रहे हैं कि कहीं उनकी कही किसी बात को वह गलत न समझ लें।
वॉल स्ट्रीट में पुरुष इस मीटू एरा में कई तरीके अपना रहे हैं। वह इसे "पेंस इफेक्ट" कहकर संबोधित कर रहे हैं। हाल ही में अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा था कि वह अपनी पत्नी के अलावा किसी अन्य महिला के साथ खाना खाने से पूरी तरह बच रहे हैं। इसी कारण ऐसे व्यवहार को पेंस इफेक्ट कहा जा रहा है। लेकिन ऐसे इफेक्ट या व्यवहार के कारण महिलाओं और पुरुषों के बीच की खाई बढ़ती जा रही है।
यहां पुरुष मीटू अभियान से डरे हुए हैं और उन्हें महिलाओं का सामना करने में असहज महसूस हो रहा है। फाइनेंशल विमेंस असोसिएशन की प्रेजिडेंट करेन इलिंसकी का कहना है, "पुरुषों के ऐसा करने से उनका करियर प्रभावित हो रहा है।" एक अन्य महिला का कहना है कि पुरुष महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार करके लिंग असमानता को बढ़ा रहे हैं।
एक महिला का कहना है, "अपने सहकर्मी का यौन उत्पीड़न न करने का ये मतलब नहीं है कि वह आपको जटिल लगे, लेकिन हम सब अपने-अपने काम में श्रेष्ठ हैं। जैसे मुझे स्टॉक्स की कोई जानकारी नहीं है। तो यहां महिलाओं के साथ काम करने में भ्रमित हो रहे मेरे वॉल स्ट्रीट के भाइयों के लिए कुछ सुझाव हैं- पहला डिक मत बनो और दूसरा अपने सहकर्मियों के साथ इज्जत से पेश आओ। लिस्ट खत्म, कृपया जल्द से जल्द अपनी सुविधानुसार मुझे परामर्श शुल्क के तौर पर एक मिलियन डॉलर भेजें, धन्यवाद।"
बता दें पुरुषों के ऐसे व्यवहार से महिलाओं में काफी गुस्सा है। उनका कहना है कि अगर किसी महिला के साथ कुछ गलत हुआ है तो वह उसके खिलाफ बोलेगी ही। अपने खिलाफ हुए अत्याचार के खिलाफ बोलना उसका हक है। इसका मतलब ये नहीं है कि उन्हें अछूता माना जाए। महिलाओं का कहना है कि उनके साथ जो भी हो रहा है वह ठीक नहीं है।