वैज्ञानिक बाघों की उप-प्रजातियों को लेकर एकमत नहीं हैं। अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता बीजिंग के पेकिंग यूनिवर्सिटी के शु जिन लोउ ने यह बात बताई। उन्होंने बताया कि उप-प्रजातियों की संख्या को लेकर सर्वसम्मति नहीं होने से विलुप्त होने के कगार पर मौजूद बाघों को बचाने के वैश्विक प्रयास आंशिक रूप से बाधित हुए हैं।
इन प्रजातियों को बेहतर ढंग से संरक्षित करने, नियंत्रित पर्यावरण और प्राकृतिक वास में प्रजनन को बढ़ावा दिए जाने का मुद्दा वैज्ञानिकों के बीच अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है। यह अध्ययन करंट बायोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।