फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाघों के वजूद पर संकट गहराया, तीन उप-प्रजातियां हुईं विलुप्त

Sat, 27 Oct 2018 04:35 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
विज्ञापन

बाघों के वजूद पर संकट गहरा गया है। एक अध्ययन में इसकी पुष्टि हुई है। अध्ययन के मुताबिक, वर्तमान में इनकी केवल छह उप-प्रजातियां ही शेष रह गई हैं। जबकि बेहतर कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में इनमें से भी कुछ उप-प्रजातियां खत्म हो जाएंगी।

विज्ञापन


छह उप-प्रजातियों में बंगाल टाइगर, आमुर बाघ (साइबेरियाई बाघ), दक्षिण चीन बाघ, सुमात्रा के बाघ, भारतीय-चीनी बाघ और मलाया के बाघ शामिल हैं। जबकि तीन उप-प्रजातियां- कैस्पियन बाघ, जावा के बाघ और बाली के बाघ विलुप्त हो चुके हैं। 

इस अध्ययन से दुनियाभर में 4,000 से भी कम संख्या में बचे बाघों को बचाने के प्रयास तेज करने में मदद मिल सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, जंगलों के कटान से उनके निवास स्थान खत्म हो रहे हैं और अवैध शिकार ने बाघों की संख्या घटाने में प्रमुख भूमिका निभाई है।

विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

उप-प्रजातियों को लेकर एकमत नहीं वैज्ञानिक

वैज्ञानिक बाघों की उप-प्रजातियों को लेकर एकमत नहीं हैं। अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता बीजिंग के पेकिंग यूनिवर्सिटी के शु जिन लोउ ने यह बात बताई। उन्होंने बताया कि उप-प्रजातियों की संख्या को लेकर सर्वसम्मति नहीं होने से विलुप्त होने के कगार पर मौजूद बाघों को बचाने के वैश्विक प्रयास आंशिक रूप से बाधित हुए हैं। 

इन प्रजातियों को बेहतर ढंग से संरक्षित करने, नियंत्रित पर्यावरण और प्राकृतिक वास में प्रजनन को बढ़ावा दिए जाने का मुद्दा वैज्ञानिकों के बीच अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है। यह अध्ययन करंट बायोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें