संयुक्त राष्ट्र में
रूस के प्रतिनिधि ने कहा कि डूमा में विद्रोहियों ने इस घटना को खुद रचा। उन्होंने इसे अमेरिका की शह पर उठाया गया कदम बताया ताकि रूस को नुकसान पहुंचाया जाए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं को जल्द से जल्द सीरिया जाकर जांच करने को कहा। उन्होंने कहा कि इस दौरान कथित हमले वाली जगह तक उन्हें रूस के सैनिक ले जाएंगे। रूस ने कहा है कि उसे क्लोरीन या अन्य किसी रसायन के इस्तेमाल के संकेत नहीं मिले हैं।
अमेरिका ने सैन्य हमला किए जाने की संभावनाओं को खारिज नहीं किया है। इससे पहले उसने पिछले साल अप्रैल में सीरिया के एयरबेस पर क्रूज मिसाइल से हमला किया था। सीरिया में विद्रोहियों के नियंत्रण वाले शेखोन में सरीन गैस के इस्तेमाल से 80 लोगों की मौत के बाद यह कदम उठाया गया था। जांचकर्ताओं ने इस हमले के लिए सीरिया को जिम्मेदार ठहराया था।
क्या हुआ था डूमा में?
सीरिया में राहत बचावकर्मियों ने शनिवार को दावा किया था कि डूमा शहर में जहरीली गैस से हमले में कम से कम 70 लोगों की मौत हुई है। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग का कहना था कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। सीरिया-अमेरिकी मेडिकल सोसाइटी ने बताया था कि पूर्वी गूटा क्षेत्र के डूमा में 500 से अधिक लोगों को स्वास्थ्य केंद्रों पर लाया गया था। सोसाइटी का कहना था कि इन लोगों को सांस लेने में परेशानी के साथ-साथ त्वचा का रंग नीला पड़ने और मुंह से झाग निकलने जैसी दिक्कतें पेश आ रही थीं।