एक अध्ययन के मुताबिक बिल्लियां अमेरिका के वन्य जीवन के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक हैं और वे हर वर्ष अरबों जानवरों को मार देती हैं।
अध्ययनकर्ताओं का अनुमान है कि बिल्लियां हर वर्ष 1.4 से 3.7 अरब पक्षियों और 6.9 से 20.7 अरब स्तनपायी जानवरों की मौत के लिए जिम्मेदार होती हैं।
नेचर कम्यूनिकेशंस पत्रिका के एक लेख में वैज्ञानिकों ने बताया है कि भटकी हुई और जंगली बिल्लियां सबसे ज्यादा जानवरों को मारती हैं।
लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि पालतू बिल्लियों से भी पक्षियों और जानवरों को खतरा होता है और पालतू बिल्लियों के मालिकों को इस खतरे को कम करने के लिए और ज्यादा कदम उठाने चाहिए।
प्रजातियों की विलुप्ति के लिए जिम्मेदार
अध्ययनकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि अमेरिका में सड़क दुर्घटनाओं, इमारतों से टकराने और जहर की वजह से मरने वाले जानवरों की तुलना में बिल्लियों के पंजों से मरने वाले जानवरों की संख्या ज्यादा है।
पालतू बिल्लियां का स्थानीय वन्यजीवन को मारने के सबूत कई द्वीपों पर मिलते हैं और इन्हें दुनिया भर में 33 प्रजातियों के विलुप्त होने के लिए जिम्मेदार माना गया है। लेकिन मुख्य भूभाग पर इनके प्रभाव के सबूत जुटाना ज्यादा मुश्किल रहा है।
इस बारे में और जानकारी के लिए स्मिथसोनियन कॉन्जर्वेशन बायोलॉजी इंस्टीट्यूट (एससीबीआई) और अमेरिकी मत्स्य और वन्यजीवन सेवा के शोधकर्ताओं ने बिल्लियों की हिंसक प्रवृति पर नजर डालने वाले पुराने अध्ययनों का पुनरीक्षण किया।
वन्यजीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा
शोधकर्ताओं के विश्लेषण में ये सामने आया कि बिल्लियां, पुराने अध्ययनों में दिए गए आंकड़ों से कहीं ज्यादा जानवरों की मौतों के लिए जिम्मेदार थीं। पुराने अनुमानों की तुलना में बिल्लियों ने चार गुना अधिक पक्षियों को मारा था।
अमेरिकन रॉबिन जैसे अमेरिका के मूल पक्षी और स्तनपायी जीवों में चूहे, छछूंदर, मूस, गिलहरी और खरगोशों को बिल्लियों से सबसे ज्यादा खतरा था।
एससीबीआई के डॉक्टर पीट मारा का कहना था कि हमारा अध्ययन इस ओर संकेत देता है कि बिल्लियां अमेरिकी वन्यजीवन के लिए सबसे बड़ा ख़तरा हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि हमारे शोध में जो इतनी बड़ी तादाद में वन्यजीवों की मौत की बात सामने आई है उससे कुछ बिल्ली मालिक अपनी बिल्लियों को अंदर रखने की जरूरत को समझेंगे और नीतिनिर्धारकों, वन्यजीवन से जुड़े वैज्ञानिकों व अन्य लोग सचेत हो जाएंगे।