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नाश्ता आपके वजन को बढ़ाता या घटाता है?

Mon, 11 Mar 2013 11:15 AM IST
बीबीसी हिंदी/क्लाउडिया हैमोंड
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सुबह का नाश्ता और हमारा वज़न दोनों का संबंध कुछ इस तरह का है कि सैंद्धांतिक रूप से ये सुनने में काफी अच्छा लगता है लेकिन जब हम इसके उदाहरणों पर ध्यान देते हैं तो चीज़ें काफी अस्तव्यस्त लगती हैं।
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जो लोग अपने बढ़ते वज़न को लेकर काफी सजग रहते हैं उन्हें हमेशा ये कहा जाता है कि वे सुबह का नाश्ता ज़रूर करें। इसी वजह से कई स्कूलों में बच्चों के लिए सुबह के नाश्ते का इंतज़ाम किया जाता है।

लेकिन सुबह-सुबह भरपेट भोजन करना हर किसी के बस की बात नहीं।

यूरोप और अमेरिका में 10-30 प्रतिशत लोग सुबह का नाश्ता नहीं करते हैं, इनमें भी लड़कियों की संख्या सबसे ज़्यादा होती है।

लेकिन इस नियम के विरोध में कई बातें कही जाती हैं, जिनमें से प्रमुख ये कि सुबह का नाश्ता नहीं करने पर आप दिन-भर ज्य़ादा खाते हैं, जिससे आपका वज़न बढ़ता है घटता नहीं।
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भले ही ये सुनने में सच जैसा लगे लेकिन सबूत ना मिल तक, इसके बारे में कुछ भी कहना कठिन है।

सुबह का नाश्ता छोड़ने का असर हमारे वज़न पर होता है, ये तय करना मुश्किल इसलिए है क्योंकि सबसे बड़ी मुश्किल ये तय करना है कि 'नाश्ते' की परिभाषा क्या है?

किस तरह के खाने को हम नाश्ता कह सकते हैं? क्या इसे हफ्ते के सभी सात दिन खाना ज़रूरी है अगर हां, तो कितने बजे तक?

उदाहरण के तौर पर अमेरिका के कृषि विभाग द्वारा किए गए एक अध्ययन में ये कहा गया कि, सुबह 10 बजे से पहले खाया गया भोजन ही नाश्ता कहलाएगा।

दूसरी समस्या ये है कि हर देश में नाश्ते का भोजन अलग-अलग होता है। स्कैनडिनेविया में जहां लोग भुनी हुई मछली खाते हैं तो जर्मनी में ठंडा गोश्त जबकि ब्रिटेन में पकाई हुई दालें।

इससे ये वैश्विक स्तर पर नाश्ते पर कोई एक-राय नहीं बन सकती क्योंकि हर देश के नाश्ते से मिलने वाला पोषण अलग होता है।

लेकिन अगर हम कैलोरी पर केंद्रित पर ध्यान दें तो पाएंगे कि इसे लेकर कई बार अध्ययन करने की बात कही गई है।

बढ़ता वज़न, कितना बड़ा मुद्दा?
साल 2004 से पहले किए शोधों के अनुसार ऐसा नहीं है कि जो लोग सुबह का नाश्ता नहीं करते वे दिनभर उसकी भरपाई करने के लिए ज्य़ादा खाते हैं।

हालांकि जो लोग नाश्ता करते थे उनका भोजन ज्य़ादा पौष्टिक ज़रूर होता था लेकिन उसमें कैलोरी बहुत ज़्यादा नहीं होती थी।

बच्चों पर किए गए चार अध्ययन के अनुसार जो बच्चे सुबह नाश्ता नहीं करते हैं उनका बीएमआई यानि बॉडी मास इंडेक्स ज्य़ादा होता है लेकिन अन्य चार अध्ययनों ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

बेनतीजा अध्ययन
जबकि साल 2011 में अमेरिका में किए गए पांच शोधपत्रों के नतीजे कुछ इस तरह से थे। तीन के मुताबिक नाश्ता ना करने और वज़न बढ़ने का आपस में कोई संबंध नहीं है और चौथे के अनुसार नाश्ता करने वाले बच्चों का वजन ज्य़ादा बढ़ता है।

इसे और पेचीदा बनाने के लिए एशिया और प्रशांत महासागर के इलाकों पर किए गए 19 शोधपत्रों के विश्लेषण में नाश्ता नहीं करने और वज़न बढ़ने का एक-दूसरे पर काफी असर दिखाया गया।

अगर हम इन हालातों को दूसरे चश्मे से देखें तो? सात अध्ययनों में पाया गया कि जिन बच्चों के वज़न ज्य़ादा होते हैं उनमें नाश्ता छोड़ने की आदत ज्य़ादा होती है, लेकिन ये शोध कई विभिन्न वर्गों में किया गया है इसलिए इससे कोई भी निष्कर्ष निकाल पाना संभव नहीं।

इसका एकमात्र विकल्प किन्हीं भी समूह के लोगों के खानपान और उनके व्यवहार के बारे में लंबे समय तक अध्ययन करना है, और ऐसा ही एक रिसर्च साल 2003 में किया गया।

इस शोध में ये पाया गया कि जो बच्चे नाश्ता छोड़ देते हैं उनका वज़न सामान्य से ज्य़ादा होता है लेकिन लंबे समय में ये पाया गया कि इन बच्चों का वज़न काफी कम हुआ है।

तो अब स्थिती ये है कि हमारे पास इस विषय पर किए गए कई शोध का नतीजा एक सा है, वो ये है कि नाश्ता ना करने वाले बच्चों का वज़न ज्य़ादा बढ़ता है लेकिन ये तय तौर पर नहीं कहा जा सकता है।

क्योंकि ये बच्चे भले ही नाश्ता नहीं करते हो लेकिन वे ज्य़ादा कैलोरी नहीं लेते।

अगर ये मुद्दा नहीं तो क्या भोजन के समय का फर्क पड़ता है? क्या हमें दो बड़े भोजनों की जगह तीन छोटे-छोटे हिस्सों में भोजन करना चाहिए।

साल 1992 में इस मुद्दे पर एक शोध किया गया था। इसमें मोटी महिलाओं को दो अलग-अलग तरीके से समान कैलोरी का डाइट प्लान दिया गया था। इस डाइट प्लान में पहले समूह की औरतों को तीन छोटे-छोटे भोजन और दूसरे समूह को दो विस्तृत भोजन दिया गया।

इसमें ये देखा गया कि जो महिलाएं सुबह नाश्ता करने की आदी नहीं थीं और उनसे नाश्ता करवाया गया, उनका वज़न घट गया और जिन्हें नाश्ता करने की आदत थी और उनसे नाश्ता छुड़वाया गया, उनका भी वज़न घट गया।

इसका सीधा मतलब ये है कि अगर आपके नियमित दिनचर्या में बदलाव लाया जाता है तो इससे आपका वज़न घट जाता है, और इसी निष्कर्ष के आधार पर हर्ट-फोर्डशायर विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिकों ने वज़न कम करने का कार्यक्रम बना लिया।

ये सब काफी पेचीदा है, तभी हाल ही में एक अख़बार ने वज़न घटाने के काल्पनिक नुस्खों में नाश्ता छोड़ने को शामिल किया है।

तो निष्कर्ष ये है कि ये एक ऐसा विषय है जिसपर कुछ भी पक्का नहीं, आप किसी एक शोध के आधार पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकते हैं, क्योंकि इस विरोध कई और अध्ययन सामने आ जाएंगे।
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लेकिन ये ज़रूर है कि नाश्ता करने से हमारा भोजन ज्य़ादा संतुलित रहता है लेकिन अंत में चुनाव आपकी अपनी पसंद और नापसंद पर होना चाहिए।
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