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बगैर ऑपरेशन कैसे कम हो मोटापा?

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अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है कि गैस्ट्रिक बैंड के ऑपरेशन के बाद वजन कम होने की वजह संभवतः आंतों में मौजूद सूक्ष्म जीवाणुओं में होने वाला बदलाव है।
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चूहों पर कराए गए अध्ययन में यह बात पता चली है कि ऑपरेशन की वजह से विभिन्न तरह के जीवाणु आंत में एकत्र होते हैं।

स्वस्थ चूहों में जब नमूने के तौर पर उन जीवाणुओं को डाला गया तो उससे अंदाजा लगा कि बिना किसी ऑपरेशन के ही उनका वजन तेजी से कम हो गया।

हालांकि हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि वे फिलहाल यह नहीं बता सकते कि उनके शोध के नतीजे के पीछे कौन सी प्रणाली काम कर रही है।

सामान्य वजन वाले लोगों के मुकाबले मोटे लोगों के पेट और आंतों के जीवाणु में फर्क है। जिन लोगों ने वजन कम करने के लिए गैस्ट्रिक बाइपास ऑपरेशन कराया है उनके आंत में पाए जाने वाले जीवाणु में भी बदलाव दिखता है।

कैसा था शोध
ताजा शोध में शोधकर्ताओं ने ज्यादा कैलोरी वाले आहार लेने वाले मोटे चूहों के तीन समूहों की तुलना की है।

एक समूह के चूहों का गैस्ट्रिक बाइपास हुआ था जबकि दूसरे समूह के चूहों का एक नकली ऑपरेशन किया गया था जिन्हें ज्यादा कैलोरी वाला आहार दिया गया।

तीसरे समूह के चूहों का भी नकली ऑपरेशन हुआ था लेकिन उन्हें वजन कम करने के लिए कम कैलोरी वाला आहार दिया गया।

एक हफ्ते बाद वास्तव में जिन चूहों का मोटापे वाला ऑपरेशन हुआ था उनके आंत में अलग तरह के जीवाणु पाए गए जो आमतौर पर पतले लोगों में पाए जाते हैं, वहीं मोटे लोगों में पाए जाने वाले जीवाणुओं की तादाद में कमी देखी गई।
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शोधकर्ताओं ने साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन में दी गई अपनी रिपोर्ट में कहा कि ऑपरेशन के तीन हफ़्ते बाद उनके शरीर के वज़न में करीब 30 फीसदी की कमी देखी गई।

जिन चूहों का नकली ऑपरेशन किया गया था उनके शरीर में मौजूद सूक्ष्म जीवाणुओं में थोड़ा बदलाव देखा गया। हालांकि जिन समूहों को कम कैलोरी का आहार दिया गया उनका वजन उतना ही कम हुआ जितना कि बाइपास सर्जरी कराने वाले चूहों का हुआ था।

पाचन क्रिया पर असर
शोधकर्ताओं ने चूहों के तीन समूहों के आंतों में मौजूद जीवाणुओं के नमूने को उन दूसरे चूहों में डाला जो कीटाणुरहित थे।

जिन चूहों में बाइपास ऑपरेशन वाले चूहे का जीवाणु डाला गया उनका वज़न दो हफ्ते में काफी घट गया जबकि दूसरे चूहों में कोई बदलाव नहीं दिखा।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सूक्ष्म जीवाणु कैसे वजन कम करने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं लेकिन एक मत यह भी है कि उनका पाचन क्रिया पर असर पड़ता है।

हॉर्वर्ड मेडिकल स्कूल में मेडिसिन के सहायक प्रोफेसर और शोध के लेखक डॉ ली काप्लान का कहना है, “हमें अभी यह जानना है कि गैस्ट्रिक बाइपास के प्रभाव के ज़रिये सूक्ष्म जीवाणुओं की तादाद में बदलाव की यह कैसा प्रणाली है।”

ऑपरेशन की जरुरत नहीं
उनका कहना है कि अगर हम बिना ऑपरेशन के इनमें से कुछ प्रभावों को हासिल करते हैं तो इससे मोटापे जैसी गंभीर समस्या से निजात पाने का एक नया तरीका मिलेगा। इससे उन मरीजों को राहत मिलेगी जो ऑपरेशन कराने में सक्षम नहीं हैं या ऑपरेशन कराना नहीं चाहते।”
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सह लेखक पीटर टर्नबॉग का कहना है, “ऐसा नहीं है कि हमारे पास एक जादू की गोली होगी जो उन सभी लोगों के लिए कारगर होगी जिनका वजन थोड़ा ज्यादा है।”

“लेकिन कम से कम हम गैस्ट्रिक बाइपास सर्जरी का कुछ विकल्प जरूर दे सकते हैं जिसका समान प्रभाव होगा।”

नैशनल ओबेसिटी फोरम के प्रोफेसर डेविड हसलैम का कहना है, “हम यह जानते हैं कि बैरियाट्रिक सर्जरी यानी मोटापा कम करने के ऑपरेशन का प्रभाव केवल यांत्रिक नहीं है लेकिन यह इतने बेहतर तरीके से कैसे कारगर है उसकी पूरी वजह भी हम नहीं जानते है। खासतौर से डायबिटीज कम करने में यह कैसे कारगर है इसका अंदाजा हमें नहीं है।”


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