भारतीय आईटी पेशेवरों और कामगारों को तगड़ा झटका देते हुए अमेरिका ने एच-1बी वीजा की प्रीमियम प्रोसेसिंग पर अस्थायी रोक पांच महीने से अधिक समय तक बढ़ा दी है। प्रीमियम प्रोसेसिंग में वीजा पर कामकाज तेजी से होने के कारण भारतीय आईटी पेशेवरों में यह काफी लोकप्रिय है। पिछले लंबित मामलों को निबटाने के लिए अमेरिका ने यह कदम उठाया है।
एच-1बी वीजा आवेदन से संबंधित छानबीन का कामकाज औसतन छह महीने में पूरा होता है। हालांकि प्रीमियम प्रोसेसिंग के तहत यूएससीआईएस को एच-1बी वीजा आवेदन पर 15 दिन में अपनी प्रतिक्रिया देनी होती है। इसके लिए 1,225 डॉलर (86,181 रुपये) का शुल्क लिया जाता है। इससे कई कंपनियों को काफी फायदा होता है। मार्च में यूएससीआईएस ने अस्थायी रूप से प्रीमियम प्रोसेसिंग पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी थी।
इस रोक की अवधि 10 सितंबर, 2018 को समाप्त हो रही थी। लेकिन अमेरिका के नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) विभाग ने मंगलवार को रोक की अवधि को 19 फरवरी, 2019 तक बढ़ाने की घोषणा की। यूएससीआईएस के मुताबिक, वर्ष 2007 से 2017 के बीच सबसे ज्यादा 22 लाख कुशल भारतीय कामगारों ने एच-1बी वीजा के लिए आवेदन किया। भारत के बाद चीन के सबसे ज्यादा 3.01 लाख लोगों ने इस वीजा के लिए आवेदन किया।