फिलाडेल्फिया में एक संघीय न्यायाधीश ने सोमवार को अमेरिकी डाक सेवा की हाल की कटौती को रोकने का आदेश दिया। इसे लेकर आलोचकों का कहना है कि सेवा में कमी के चलते मेल में देरी हो रही है और राष्ट्रपति चुनाव की अखंडता को खतरा पैदा हो रहा है। गौरतलब है कि अमेरिका में कोरोना के चलते मेन इन वोटिंग भी हो रही है।
यूएस डिस्ट्रिक्ट न्यायाधीश जेराल्ड ए मैकहुग जूनियर ने कहा कि छह राज्यों और कोलंबिया जिले ने खुद ही डाक सेवा को लेकर पुख्ता सबूत पेश किए हैं। इससे पता चलता है कि जुलाई महीने से ही देश में मेल के आने में देरी में वृद्धि हुई है।
मैकहुग ने प्रारंभिक निषेधाज्ञा देते हुए लिखा कि महामारी के कारण, राज्य पहले के ज्यादा मेल पर निर्भर हो गए हैं। खासतौर पर जब बात राष्ट्रपति चुनावों के प्रबंधन की हो। वहीं, मेल के आने में हो रही देरी को लेकर डाक सेवा ने सफाई दी है।
अमेरिकी डाक सेवा के वकीलों का कहना है कि नए पोस्टमास्टर जनरल लुइस डेजॉय ने कभी भी मेल को देरी से भेजने या ओवरटाइम प्रतिबंध लगाने का आदेश नहीं दिया। हालांकि, उन्होंने पिछले हफ्ते अदालत में स्वीकार किया कि स्थानीय डाक प्रबंधकों ने वाशिंगटन से इस तरह से मार्गदर्शन का पालन किया हो।
स्पष्टता में कमी को देखते हुए, मैकहुग ने कहा, एक राष्ट्रीय निषेधाज्ञा जो दूसरों के लिए जारी की गई थी, उसकी आवश्यकता है। राज्य के अधिकारियों ने मैकहुग को बताया था कि जुलाई से अगस्त तक प्रथम श्रेणी के मेल की समय पर डिलीवरी में 10 फीसदी की गिरावट आई है। इससे उन ग्राहकों के लिए खतरा पैदा हो गया है, जो भोजन, दवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए मेल डिलीवरी पर निर्भर रहते हैं।
मैकहुग से पहले यह मामला पेंसिल्वेनिया, कैलिफोर्निया, डेलावेयर, मेन, मैसाचुसेट्स, उत्तरी कैरोलिना और कोलंबिया जिले में अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर किया गया था। वाशिंगटन राज्य और न्यूयॉर्क में संघीय न्यायाधीशों ने इसी महीने इस तरह के आदेश जारी किए थे।