अमेरिका ने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मध्यम से उच्च दक्षता वाले एच-1 बी पदों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा करते हुए कहा है कि वह इस कार्यक्रम’ पर 15 करोड़ डॉलर (1,100 करोड़ रुपये) खर्च करेगा। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र भी शामिल हैं, जिसमें हजारों की संख्या में भारतीय पेशेवर काम करते हैं।
बता दें कि एच-1 बी गैर-आव्रजक वीजा है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां विशेष तकनीकी दक्षता वाले पदों पर विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति हासिल करती है। भारतीयों के बीच यह वीजा काफी लोकप्रिय है।
अमेरिका के श्रम मंत्रालय ने कहा कि मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी या आईटी, साइबर सुरक्षा, आधुनिक विनिर्माण, परिवहन जैसे क्षेत्रों में ‘एच-1 बी एक श्रमबल अनुदान कार्यक्रम’ का इस्तेमाल किया जाएगा और मौजूदा के साथ नई पीढ़ी के कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि भविष्य के लिए श्रमबल तैयार किया जा सके।
मंत्रालय ने कहा, कोरोना की वजह से न सिर्फ श्रम बाजार बाधित हुआ, बल्कि इसके चलते कई शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करने वालों तथा नियोक्ताओं को भी सोचना पड़ रहा है कि वे अपने कर्मचारियों को कैसे प्रशिक्षित करें। ऐसे में हम एकीकृत श्रमबल प्रणाली और तर्कसंगत बनाएंगे।
ऑनलाइन व अन्य प्रशिक्षण शामिल
अमेरिकी श्रम मंत्रालय के मुताबिक, इस अनुदान कार्यक्रम के तहत हमारा रोजगार एवं प्रशिक्षण प्रशासन वित्तपोषण और संसाधनों को और व्यवस्थित करेगा।
इस अनुदान के लिए आवेदन करने वालों को नवोन्मेषी प्रशिक्षण रणनीतियों के जरिये कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना होगा। इनमें ऑनलाइन और अन्य प्रौद्योगिकी आधारित प्रशिक्षण शामिल है। ऐसा करने से अहम क्षेत्रों में मध्यम व उच्च कौशल वाले कर्मचारी उपलब्ध होंगे।
छात्र, शोधकर्ता एवं पत्रकारों की वीजा समयसीमा पर प्रस्ताव पेश
ट्रंप प्रशासन ने देश की सुरक्षा को कारण बताते हुए अमेरिका में विदेशी छात्रों, शोधकर्ताओं और पत्रकारों के वीजा के लिए एक निर्धारित समयसीमा का प्रस्ताव पेश किया है। उसने मौजूदा वीजा कार्यक्रम के दुरुपयोग पर चिंता भी जताई।
हालांकि इस प्रस्ताव में किसी एक देश के नाम का जिक्र नहीं है, लेकिन इसे प्रणाली में मौजूदा खामियों का चीन द्वारा दुरुपयोग करने के तहत लाया गया है।
बता दें कि विदेशी छात्रों, शोधकर्ताओं और पत्रकारों की वीजा श्रेणियों में सर्वाधिक लाभ चीन को ही हुआ है। प्रस्तावित नियम के तहत ‘एफ-वीजा’ (छात्रों) और ‘जे वीजा’ (अनुसंधान या शोधकर्ताओं) गैर प्रवासियों को उनका कार्यक्रम खत्म होने की अंतिम तिथि तक के लिए अमेरिका में प्रवेश दिया जाएगा और इसकी अधिकतम अवधि चार साल होगी।
अमेरिकी गृह मंत्रालय ने कहा कि जिन देशों के नागरिकों के वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में रहने की दर अधिक है, उनके नागरिकों को दो साल की तय अवधि के लिए ही रहने की अनुमति होगी।
इसके अलावा मंत्रालय ने ‘आई’ गैर प्रवासियों (विदेशी पत्रकारों) के लिए 240 दिन की समय सीमा तय करने का प्रस्ताव रखा हैं, जिसे उनके कार्य को देखते हुए अधिकतम 240 और दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता हैं।
आतंक समर्थक देशों में जन्मे लोगों की अवधि दो वर्ष
मंत्रालय ने कहा कि यदि कोई विदेशी ‘आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों’ की सूची में शामिल देश में जन्मा है या उसके पास ऐसे किसी देश की नागरिकता है, तो ऐसी स्थिति में भी उसके अमेरिका में ठहरने की अवधि अधिकतम दो साल के लिए सीमित की जा सकती है। इसी तरह विदेशी छात्रों को देश छोड़ने के लिए अब मौजूदा 60 दिन के बजाय 30 दिन मिलेंगे।