सेंसर टॉवर एजेंसी के आंकड़ों से जाहिर हुआ कि धुर दक्षिणपंथी सोशल मीडिया नेटवर्किंग ऐप मी-वी, रंबल, पार्लर और क्लाउटहब से मैटेरियल डाउनलोड करने की संख्या में भी गिरावट आई है। न्यूजह्विप नाम की एजेंसी से मिले आंकड़ों से जाहिर हुआ है कि सबसे ज्यादा गिरावट समाचार माध्यमों के सोशल मीडिया इंगेजमेंट में आई है। ऐसे वामपंथ और दक्षिणपंथ की तरफ झुकाव वाले दोनों तरह के मीडिया के साथ हुआ है। उनके सोशल मीडिया में इंगेजमेंट 50 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट आई है, जबकि मेनस्ट्रीम मीडिया के सोशल मीडिया इंगेजमेंट में औसत गिरावट 42 फीसदी की रही है।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि आम तौर पर जब कोई पार्टी सत्ता में आती है, तो उसके विरोधी मीडिया के ट्रैफिक में इजाफा होता है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की विदाई जिस तरह विवादों के बीच हुई, उस कारण बाइडन के सत्ता में आने का लाभ दक्षिणपंथी मीडिया को नहीं मिला है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में मीडिया, संस्कृति और संचार विभाग के प्रमुख रॉडनी बेनसन ने वेबसाइट एक्सियोस से कहा, ''चूंकि ट्रंप को सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर प्रतिबंधित कर दिया गया है, उसकी वजह से विपक्षी मीडिया का ट्रैफिक घटा है।''
बेनसन ने ध्यान दिलाया कि जो बाइडन के शासनकाल में आर्थिक और दूसरी नीतियों पर काफी बहस हो रही है, लेकिन इसमें व्यक्ति आधारित विवाद का अभाव है। इससे विपक्ष को उन पर हमला बोलने का मौका नहीं मिला है। इसका असर ट्रंप समर्थक मीडिया के लिए ट्रैफिक पर पड़ा है। कुछ जानकारों का कहना है कि इस एक वजह यह भी है कि पिछले एक साल में कंजरवेटिव पॉडकास्ट्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। इससे रिपब्लिकन पार्टी समर्थक लोग अपना समय उसमें लगा रहे हैँ। कंजरवेटिव मीडिया के विश्लेषक हॉवर्ड पोल्स्किन के मुताबिक दक्षिणपंथी पॉडकास्ट्स को सुनने वालों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।