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अमेरिका: ट्रंप के राष्ट्रपति पद से हटते ही संकट में आई अमेरिकी मीडिया इंडस्ट्री, लोगों ने छोड़ा खबरें पढ़ना और देखना!

Wed, 30 Jun 2021 03:34 PM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

पिछले फरवरी से मई तक के वेब ट्रैफिक, सोशल मीडिया इंगेजमेंट और एप यूज सेशंस का अध्ययन किया गया। इससे पता चला कि पूरी मीडिया इंडस्ट्री से पाठक/ श्रोता/ दर्शकों की संख्या में गिरावट आई है।
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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड टंप - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद से हटने का सबसे ज्यादा नुकसान वहां के न्यूज मीडिया को हुआ है। हाल ही में हुए एक अध्ययन से सामने आया है कि ट्रंप के व्हाइट हाउस से विदा होने के बाद से न्यूज मीडिया के फॉलोवरों की संख्या में भारी गिरावट आई है। ये गिरावट उन समाचार माध्यमों के मामले में ज्यादा है, जिनकी पहचान किसी एक पक्ष के समर्थक की है। 
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विश्लेषकों का कहना है कि जो समाचार माध्यम विवादों पर ज्यादा निर्भर रहते हैं, उन्हें जो बाइडन के दौर में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस शोध में पिछले फरवरी से मई तक के वेब ट्रैफिक, सोशल मीडिया इंगेजमेंट और एप यूज सेशंस का अध्ययन किया गया। इससे पता चला कि पूरी मीडिया इंडस्ट्री से पाठक/ श्रोता/ दर्शकों की संख्या में गिरावट आई है। सबसे ज्यादा नुकसान दक्षिणपंथी विचारधारा के समर्थक माध्यमों को हुआ है। ये अध्ययन वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने किया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स समेत इन समाचार पत्रों के पाठक घटे
कॉम्सकोर नाम की एजेंसी के आंकड़ों के अध्ययन से सामने आया कि न्यूजमैक्स और द फेडरलिस्ट जैसे माध्यमों के लिए पाठक/ दर्शक ट्रैफिक में पिछले फरवरी से मई के बीच 44 प्रतिशत की गिरावट आई। वामपंथी माध्यमों- मदर जोन्स और रॉ स्टोरी के लिए ट्रैफिक में 27 फीसदी की कमी आई। न्यूयॉर्क टाइम्स, द वॉल स्ट्रीट जर्नल, यूएसए टुडे और रॉयटर्स जैसे मेनस्ट्रीम मीडिया का ट्रैफिक 18 फीसदी घटा। दक्षिणपंथी झुकाव वाले फॉक्स न्यूज और डेली कॉलर और वामपंथ की तरफ झुकाव वाले बजफीड न्यूज और द अटलांटिक के औसत ऐप यूज में भारी गिरावट दर्ज हुई है। ये गिरावट 26 से 31 फीसदी तक रही।  
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सोशल मीडिया इंगेजमेंट में 50 फीसदी कमी आई

सेंसर टॉवर एजेंसी के आंकड़ों से जाहिर हुआ कि धुर दक्षिणपंथी सोशल मीडिया नेटवर्किंग ऐप मी-वी, रंबल, पार्लर और क्लाउटहब से मैटेरियल डाउनलोड करने की संख्या में भी गिरावट आई है। न्यूजह्विप नाम की एजेंसी से मिले आंकड़ों से जाहिर हुआ है कि सबसे ज्यादा गिरावट समाचार माध्यमों के सोशल मीडिया इंगेजमेंट में आई है। ऐसे वामपंथ और दक्षिणपंथ की तरफ झुकाव वाले दोनों तरह के मीडिया के साथ हुआ है। उनके सोशल मीडिया में इंगेजमेंट 50 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट आई है, जबकि मेनस्ट्रीम मीडिया के सोशल मीडिया इंगेजमेंट में औसत गिरावट 42 फीसदी की रही है।

पर्यवेक्षकों का कहना है कि आम तौर पर जब कोई पार्टी सत्ता में आती है, तो उसके विरोधी मीडिया के ट्रैफिक में इजाफा होता है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की विदाई जिस तरह विवादों के बीच हुई, उस कारण बाइडन के सत्ता में आने का लाभ दक्षिणपंथी मीडिया को नहीं मिला है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में मीडिया, संस्कृति और संचार विभाग के प्रमुख रॉडनी बेनसन ने वेबसाइट एक्सियोस से कहा, ''चूंकि ट्रंप को सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर प्रतिबंधित कर दिया गया है, उसकी वजह से विपक्षी मीडिया का ट्रैफिक घटा है।''

बेनसन ने ध्यान दिलाया कि जो बाइडन के शासनकाल में आर्थिक और दूसरी नीतियों पर काफी बहस हो रही है, लेकिन इसमें व्यक्ति आधारित विवाद का अभाव है। इससे विपक्ष को उन पर हमला बोलने का मौका नहीं मिला है। इसका असर ट्रंप समर्थक मीडिया के लिए ट्रैफिक पर पड़ा है। कुछ जानकारों का कहना है कि इस एक वजह यह भी है कि पिछले एक साल में कंजरवेटिव पॉडकास्ट्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। इससे रिपब्लिकन पार्टी समर्थक लोग अपना समय उसमें लगा रहे हैँ। कंजरवेटिव मीडिया के विश्लेषक हॉवर्ड पोल्स्किन के मुताबिक दक्षिणपंथी पॉडकास्ट्स को सुनने वालों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
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