हाल के महीनों में चीन ने अपना परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ाने की रफ्तार बहुत तेज कर दी है। जानकारों का कहना है कि ऐसा संभवतः उसने ताइवान मामले में अमेरिका के हस्तक्षेप की आशंका के कारण किया है। चीन की कोशिश परमाणु हथियारों के मामले में अमेरिका के साथ सामरिक बराबरी हासिल करना है।
अमेरिका की गैर-सरकारी संस्था आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन ने परमाणु हथियारों के बारे में एक फैक्ट शीट जारी किया है। उसके मुताबिक इस समय चीन के पास सिर्फ 350 परमाणु हथियार हैं, जबकि अमेरिका के पास ऐसे 5,500 हथियार हैं। लेकिन अमेरिकी विशेषज्ञों ने कहा है कि चीन 2027 तक अपने परमाणु हथियारों की संख्या दो गुना करना चाहता है। उसकी योजना 2027 तक 700 और 2030 तक एक हजार परमाणु हथियार बना लेने की है।
अमेरिका के स्ट्रेटेजिक कमांड से जुड़े एडमिरल चार्ल्स रिचर्ड ने कहा है कि चीन भूमि, जल और हवा से परमाणु हथियार दागने की अपनी क्षमता में अति तीव्र गति से वृद्धि कर रहा है। अमेरिका के साथ सामरिक बराबरी हासिल करने के लिए अपने बुनियादी ढांचे को वह हर क्षेत्र में मजबूत कर रहा है। एडमिरल रिचर्ड ने कहा कि जहां तक परमाणु क्षमताओं में स्ट्रेटेजिक ब्रेकआउट (सामरिक समानता) की बात है, तो चीन वह पहले ही हासिल कर चुका है। इसलिए अब अमेरिका को अपनी क्षमता बढ़ाने की योजना बनानी होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी ने उसके परमाणु जखीरे को धारदार बना दिया है। चीन ने कुछ महीने पहले हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हिकल का परीक्षण किया था। इस मिसाइल ने 100 मिनट की उड़ान में 40 हजार किलोमीटर की दूरी तय की। इस टेक्नोलॉजी के कारण अब चीन दुनिया में किसी भी ठिकाने पर हमला करने में सक्षम हो गया है।
वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन लंबी दूरी तक मार करने वाली 250 से ज्यादा मिसाइलें बना रहा है। अनुमान लगाया गया है कि इससे जमीन से परमाणु हथियार दागने की उसकी क्षमता में अत्यधिक बढ़ोतरी हो जाएगी। बताया जाता है कि ये मिसाइलें 12 हजार से 15 हजार किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होंगी।
एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन चलती ट्रेन पर से परमाणु हथियार से लैस मिसाइल दागने की क्षमता हासिल करने के लिए प्रयोग कर रहा है। जहां तक समुद्री क्षमता का सवाल है, तो फिलहाल चीन के पास चार ऐसी पनडुब्बियां हैं, जो टाइप-94 बैलिस्टिक मिसाइलों को ढोने में सक्षम हैं। ये मिसाइलें रूस और भारत तक हमला करने में सक्षम हैं। साथ ही ये अमेरिकी राज्य अलास्का, हवाई और अमेरिकी द्वीप गुआम को भी निशाना बना सकती हैं।
अमेरिकी विशेषज्ञ लगातार अमेरिका सरकार को आगाह कर रहे हैं कि रूस के खिलाफ अपनी ताजा मुहिम को चलाते समय वह चीन की अनदेखी ना करे। इन विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका के लिए असल चुनौती चीन पेश कर रहा है। इसकी वजह यह है कि चीन ने अति उच्च तकनीक में महारत हासिल कर ली है। साथ ही उसके पास हथियारों के बारे में अनुसंधान करने और उन्हे विकसित करने के लिए जरूरी आर्थिक संसाधन भी मौजूद हैं।