अमेरिका और उसके सहयोगियों ने चीन पर वैश्विक साइबर जासूसी अभियान का एक बार फिर आरोप लगाया है। बीजिंग द्वारा इन आरोपों पर नाराजगी जताने के बावजूद इन सहयोगी देशों ने चीन को आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया। चीन की आलोचना करने वाले देशों में अमेरिका के अलावा यूरोपीय संघ (ईयू), ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, जापान और न्यूजीलैंड शामिल हैं।
इन सभी देशों ने चीन पर वैश्विक साइबर जासूसी का आरोप लगाया है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा कि इस तरह की हैकिंग और साइबर जासूसी हमारी आर्थिक व राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
इसके साथ ही, अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने चार चीनी नागरिकों पर अमेरिका और विदेश में दर्जनों कंपनियों, विश्वविद्यालयों और सरकारी एजेंसियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। इन चार चीनी नागरिकों में तीन सुरक्षा अधिकारी हैं जबकि चौथा कॉन्ट्रैक्ट हैकर है।
अमेरिका ने कहा है कि हमारी संघीय एजेंसियां जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद व एफबीआई शामिल हैं, वे 50 से ज्यादा तकनीकों की रूपरेखा तैयार करेंगी जिनका इस्तेमाल चीनी निकाय अमेरिकी नेटवर्क को निशाना बनाने में करते हैं।
राजनीतिक मकसद से गढ़े आरोप : चीन
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा है कि ये सभी आरोप राजनीतिक मकसद से गढ़े गए हैं और चीन इन्हें किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने मंगलवार को कहा कि चीन किसी भी साइबर हमले में शामिल नहीं है। वाशिंगटन में भी चीनी दूतावास के प्रवस्ता लियू पेंग्यु ने चीन के खिलाफ आरोपों को गैर-जिम्मेदाराना बताया।
चीन संबंधी रणनीति में मित्र देश साझेदार
व्हाइट हाउस ने कहा है कि बाइडन प्रशासन की चीन संबंधी रणनीति में अमेरिका के मित्र एवं अहम सहयोगी पूरी तरह साझेदार है। यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब अमेरिकी नेतृत्व में कई देशों ने चीन पर दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप लगाया है।
इन देशों में शामिल ईयू, ब्रिटेन, कनाडा, जापान ने चीन की दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों को उजागर करने के लिए अमेरिका से हाथ मिलाया है।