भारतीय मूल के छात्रों और भारत के लगभग 11 विद्यार्थियों की मौत की खबर के बाद उनके अभिभावक के माथे पर चिंता की रेखाएं खिंची हुई हैं। हाल ही में एक भारतीय-अमेरिकी शिक्षाविद् ने अभिभावकों की चिंता शांत करते हुए कहा कि अमेरिका भारत के विद्यार्थियों को अच्छा वातावरण दे रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक हुई घटनाएं चिंताजनक हैं लेकिन इन मौतों का कोई विशेष पैटर्न नहीं है।
वर्जीनिया में जार्ज मेसन यूनिविर्सिटी में स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग के डिवीजनल डीन गुरदीप सिंह ने इस बात पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद दुखद है कि इन घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। एक माता-पिता के तौर पर चिंतित होना वाजिब है। लेकिन इन घटनाओं का अब तक कोई भी एक साथ पैटर्न नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि चिंता की बात तब होती जब ये घटनाएं किसी विशेष विश्वविद्यालय में लगातार होती। वे बताते हैं कि भारतीय राजनयिक मिशनों ने सक्रिय होकर भारतीय विद्यार्थियों से मिलना शुरू कर दिया है। छात्र संघों से बातचीत शुरू भी कर दी है। हर किसी को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
संवेदनशील इलाकों पर सतर्क रहना आवश्यक
गुरदीप सिंह ने कहा कि उन इलाकों पर सतर्क रहने की आवश्यक है। हर शहर में कुछ ऐसे संवेदनशील इलाके होते हैं जहां अपराध दर अन्य इलाकों की तुलना में अधिक होते हैं। अमेरिका में अधिकांश परिसर विश्वविद्यालय है, जो कि सुरक्षित भी है।
तीन गुना बढ़ी है अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या
इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन की ओपन डोर्स रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या सत्र 2014-2015 में 1,32,888 थी। यह संख्या वर्ष 2024 में बढ़कर 3,53,803 हो गई है। जो कि लगभग तीन गुना बढ़ी है।
11 मौत के कारणों की जांच की मांग
गैर-लाभकारी संस्था हिंदूएक्शन के कार्यकारी निदेशक उत्सव चक्रवर्ती ने इस साल 11 भारतीय छात्रों की मौत पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि “पिछले कुछ महीनों में, हमारे पास पहले ही 11 मामले आ चुके हैं। वे कहते हैं कि एफबीआई का ध्यान इस ओर जाना चाहिए। वे जांच करें कि क्या कारण है? इन मौतों के बीच आपस में कोई संबंध तो नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि एक समुदाय के रूप में हम वास्तव में चिंतित हैं। इन मौतों की अधिक विस्तृत जांच की आवश्यकता है। मुझे लगता है कि अमेरिकी हिंदू होने के नाते हम उम्मीद करते हैं कि कोई पैटर्न सामने न आए।
तीन सप्ताह में 7 छात्रों की हुई है मौत
कास्ट गेट की एक डेटा एनालिटिक्स टीम ने एक बयान में कहा कि छात्रों की बढ़ती मौतों की चिंताजनक है। महज तीन सप्ताह में 15 जनवरी से 5 फरवरी तक, भारतीय मूल के सात छात्रों ने रहस्यमय परिस्थितियों में दुखद रूप से अपनी जान गंवा दी।