वैज्ञानिकों ने ब्रिटेन के नेशनल हेल्थ सर्विस से जुड़े तीन अस्पतालों में 25,856 और अमेरिका के नॉर्थ वेस्टर्न मेडिसिन में 3,097 महिलाओं समेत करीब एक लाख मैमोग्राम डाटा पर अध्ययन किया। इसमें स्तन कैंसर की सटीक पहचान हुई।
डॉक्टर 9.4 फीसदी ब्रेस्ट कैंसर के ट्यूमर को नहीं पहचान पाए लेकिन एआई से जांच के बाद ये आंकड़ा 2.7 फीसदी हो गया। इसी तरह कैंसर की गलत पहचान के मामले 5.7 फीसदी थे जो घटकर 1.2 फीसदी रह गया।
शोधकर्ताओं ने मशीन के 14 ट्रायल के बाद पाया कि चिकित्सक 86 फीसदी मामले को पहचान लेते हैं जबकि मशीन ने 87 फीसदी कैंसर के मामलों को पहचान लिया।
कंप्यूटर ऐसे मामलों में सबसे बेहतर
गूगल हेल्थ के सॉफ्ट इंजीनियर और शोध के सह लेखक स्कॉट मैकिनी कहते हैं कि कंप्यूटर इस मामले में सबसे बेहतर हैं। उम्मीद है कि भविष्य में ये तकनीक रेडियॉलाजिस्ट के लिए मददगार बनेगी जिससे वे स्तन कैंसर के ट्यूमर को पकड़ सकेंगे और गलत रिपोर्टिंग के मामले भी कम होंगे।
एआई चिकित्सा क्षेत्र में फैसले लेने में अहम भूमिका निभाएगा और डॉक्टरों और अन्य स्टाफ का भार भी कम करेगा।