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एआई से कमजोर हो रही सोचने की ताकत: रिपोर्ट में हुआ खुलासा, चने-समझने की क्षमता बचाने के लिए अपनाएं ये तरीके

Sat, 26 Sep 2026 07:01 AM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

एआई पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों में यह चिंता बढ़ रही है कि इससे खासकर छात्रों की सोचने, समझने और तर्क करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, गहन सोच विकसित करने के लिए जानकारी की प्रामाणिकता जांचना, सवाल पूछना, सबूतों का विश्लेषण करना और अलग-अलग नजरियों को समझना जरूरी है।
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प्रतिकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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आप किसी सोशल मीडिया पोस्ट पर नजर डालें या कोई भी न्यूज वेबसाइट खंगालकर देखें, हर तरफ बस कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की चर्चा ही छाई है। कोई इसके फायदे गिना रहा तो कोई इसके खतरों को लेकर आगाह कर रहा है। एआई निजता में सेंध लगा रहा, लोगों की नौकरियां छिन जाएंगी, पूरी मानवता खतरे में आ जाएगी...ऐसी तमाम आशंकाओं के बीच एक बात सौ फीसद सच है कि इस पर अत्यधिक निर्भरता लोगों की सोचने-समझने की क्षमता को कुंद कर रही है।

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गहन सोच और तार्किक क्षमता बढ़ाने की जरूरत
अगर आप चाहते हैं कि एआई के इस दौर में भी आपका दिमाग कमजोर न पड़े तो गहन सोच और तार्किक क्षमता बढ़ाने जैसे अभ्यास लगातार करते रहें। दुनियाभर के शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों को मौजूदा समय में यह चिंता सता रही है कि अब जबकि एआई झट से हमारी हर समस्या का समाधान निकाल दे रहा है, लोगों खासकर छात्रों की तार्किक क्षमता तेजी से कमजोर हो रही है। हाल ही में पेकिंग स्थित सिंघुआ यूनिवर्सिटी के शिक्षा शोधकर्ता लिक्सियांग यान ने एक ऑनलाइन कोर्स के दौरान पाया कि कोडेक्स एआई एजेंट छात्रों की जगह खुद सारे असाइनमेंट पूरे कर सकता था, सवालों के जवाब दे सकता था। एजेंसी

छात्रों में तर्कसंगत सोच बढ़ाना शिक्षकों की जिम्मेदारी
शिक्षकों को असाइनमेंट और परीक्षाओं का प्रारूप इस तरह तैयार करना चाहिए जिससे छात्र केवल एआई से कॉपी-पेस्ट न कर सकें। बल्कि व्यक्तिगत अनुभव, व्यावहारिक डाटा का विश्लेषण होना चाहिए। क्रिटिकल थिंकिंग या गहन सोच को हर जगह एक तरह से लागू नहीं किया जा सकता। इतिहास में क्रिटिकल थिंकिंग का मतलब स्रोतों की प्रामाणिकता जांचना है, जबकि विज्ञान में यह सबूतों और सिद्धांतों के बीच के संबंध को समझना है। इसलिए विषय के अनुसार अलग तर्क पद्धतियों का अभ्यास करें। क्रिटिकल थिंकिंग रातों-रात नहीं आती। वर्षों के अभ्यास, निरंतर अध्ययन और विभिन्न विषयों को गहराई से समझने से दिमाग मजबूत होता है। इसलिए शॉर्टकट छोड़कर दिमाग पर थोड़ा दबाव डालने की आदत को बरकरार रखना होगा।
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समझने की क्षमता प्रभावित कर रहा जनरेटिव एआई
शोधकर्ताओं ने पाया कि अब छात्रों को गहराई से सोचना और तर्क करना सिखाना अधिक आवश्यक हो गया है।

  • नेचर पत्रिका में प्रकाशित शोध के मुताबिक, अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ कॉलेजेस एंड यूनिवर्सिटीज के एक सर्वे में 90% से अधिक प्रोफेसरों ने माना कि जनरेटिव एआई छात्रों के सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है।
  • वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डैनियल विलिंगहैम का कहना है कि सीखने की प्रक्रिया दिमाग पर जोर डालने से होती है।

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गहराई से विश्लेषण करेंगे तो तर्कसंगत निकलेंगे निष्कर्ष

  • अगर कोई जानकारी सामने आई तो उसे समझने के लिए खुद से सवाल करें, जैसे यह कहां से आई? क्या यह पूरी तरह सच है?
  • एआई से सीधे जवाब मांगने के बजाय उससे ऐसे सवाल पूछें जो आपको सोचने, प्रति-प्रश्न करने या अपनी गलतियां खोजने के लिए प्रेरित करें।
  • भावनाओं या पूर्वाग्रहों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय ठोस आंकड़ों और सबूतों पर गौर करें।
  • यह समझने की कोशिश करें कि यह किसी की पसंद-नापसंद सोच को प्रभावित तो नहीं कर रही।
  • कोई एक पक्ष मानने के बजाय अलग-अलग नजरिये से समझें।
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