अमेरिका के चौथे सबसे बड़े बैंक सिटीग्रुप के सीईओ माइकल कॉर्बेट के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) यानि कृत्रिम बुद्धि के बढ़ते इस्तेमाल से भविष्य में अमेरिकी कॉल सेंटरों में काम करने वाले एक लाख लोगों की नौकरियां खत्म हो सकती हैं।
कॉर्बेट का मानना है कि हालांकि इस पूरी कवायद में इंसानी श्रम की जरूरत कम होगी। लेकिन बावजूद इसके कई काम ऐसे हैं जिनके लिए इंसानों की जरूरत बनी होगी। कॉर्बेट कहते हैं कि इसलिए हम एआई की वजह से नौकरियां जाने की बात कहकर लोगों को निराश नहीं करना चाहते हैं।
एआई और मशीन लर्निंग का उपयोग बढ़ने के साथ कई लोगों का मानना है कि इनकी वजह से विभिन्न क्षेत्रों में नौकरियां तेजी से खत्म होंगी। इसका असर आईटी, बैंकिंग जैसे उद्योग क्षेत्रों में दिख भी रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि एआई जिंदगी को आसान बना रही है। यह मनुष्य बुद्धि की पूरक ही रहेगी, उसकी जगह नहीं ले पाएगी।
वैश्विक आईटी एडवाइजरी फर्म गार्टनर के रिसर्च वाइस प्रेसिडेंट एलेक्जेंडर लिंडन के मुताबिक एआई की कभी मानव मस्तिष्क से तुलना नहीं की जा सकती है। यह भले मस्तिष्क से प्रेरित हो, पर इसके बराबर नहीं हो सकती।
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के कंप्यूटर वैज्ञानिक डॉ. पीटर बेंटली का कहना है कि एआई फैक्टरी ऑटोमेशन या रोबोट की तरह नहीं है। यह लगभग इंटरनेट की तरह ऐसी टेक्नोलॉजी है जो विभिन्न उद्योगों में नई नौकरियां पैदा कर रही है। टीचर, वकील, सेल्स, मार्केटिंग और कंप्यूटर डेवलप्मेंट ऐसे क्षेत्र हैं जहां इससे नौकरियों के नए मौके पैदा हो रहे हैं।