फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिटी ग्रुप के सीईओ ने कहाः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बावजूद बनी रहेगी इंसानों की जरूरत

Mon, 25 Feb 2019 02:34 PM IST
अनिल पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
विज्ञापन

अमेरिका के चौथे सबसे बड़े बैंक सिटीग्रुप के सीईओ माइकल कॉर्बेट के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) यानि कृत्रिम बुद्धि के बढ़ते इस्तेमाल से भविष्य में अमेरिकी कॉल सेंटरों में काम करने वाले एक लाख लोगों की नौकरियां खत्म हो सकती हैं। 

विज्ञापन


सिटीग्रुप के दुनियाभर में 2.09 लाख कर्मचारी हैं। बैंक का मानना है कि कर्मचारियों की इतनी बड़ी संख्या से इसकी लागत पर दबाव पड़ रहा है। बैंक अपने कामकाज के लिए एआई का भी इस्तेमाल करता है जिस पर सालाना 800 करोड़ डॉलर (करीब 56,800 करोड़) का खर्च भी शामिल है। 

कॉर्बेट के अनुसार एआई से कंपनियों के काम करने के तरीकों में बड़ा बदलाव आएगा। इससे ग्राहकों का अनुभव बेहतर होगा। एआई के इस्तेमाल से ग्राहकों के अधिकतर सवालों के जवाब देने आसान हो जाएंगे। ग्राहकों को सेवाएं मुहैया कराने का खर्च कम हो जाएगा। 

क्यों अहम हैं सिटी बैंक सीईओ का बयान

कॉर्बेट का मानना है कि हालांकि इस पूरी कवायद में इंसानी श्रम की जरूरत कम होगी। लेकिन बावजूद इसके कई काम ऐसे हैं जिनके लिए इंसानों की जरूरत बनी होगी। कॉर्बेट कहते हैं कि इसलिए हम एआई की वजह से नौकरियां जाने की बात कहकर लोगों को निराश नहीं करना चाहते हैं। 

विज्ञापन


दो साल पहले सिटीग्रुप के पूर्व-सीईओ विक्रम पंडित ने कहा था पांच साल में एआई सिटीग्रुप की एक तिहाई नौकरियों की जगह ले लेगी। उनका यह अनुमान इस बैंक के 10 साल के पूर्वानुमान के मुताबिक था। इस संदर्भ में कॉर्बेट का यह बयान अहम हो जाता है। 

इंसानों की जगह नहीं ले सकती एआई

एआई और मशीन लर्निंग का उपयोग बढ़ने के साथ कई लोगों का मानना है कि इनकी वजह से विभिन्न क्षेत्रों में नौकरियां तेजी से खत्म होंगी। इसका असर आईटी, बैंकिंग जैसे उद्योग क्षेत्रों में दिख भी रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि एआई जिंदगी को आसान बना रही है। यह मनुष्य बुद्धि की पूरक ही रहेगी, उसकी जगह नहीं ले पाएगी। 

वैश्विक आईटी एडवाइजरी फर्म गार्टनर के रिसर्च वाइस प्रेसिडेंट एलेक्जेंडर लिंडन के मुताबिक एआई की कभी मानव मस्तिष्क से तुलना नहीं की जा सकती है। यह भले मस्तिष्क से प्रेरित हो, पर इसके बराबर नहीं हो सकती। 

एआई से कुछ नई नौकरियां पैदा हुईं

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के कंप्यूटर वैज्ञानिक डॉ. पीटर बेंटली का कहना है कि एआई फैक्टरी ऑटोमेशन या रोबोट की तरह नहीं है। यह लगभग इंटरनेट की तरह ऐसी टेक्नोलॉजी है जो विभिन्न उद्योगों में नई नौकरियां पैदा कर रही है। टीचर, वकील, सेल्स, मार्केटिंग और कंप्यूटर डेवलप्मेंट ऐसे क्षेत्र हैं जहां इससे नौकरियों के नए मौके पैदा हो रहे हैं। 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें