रूस में राष्ट्राध्यक्षों का लंबे समय तक सत्ता पर काबिज रहने का इतिहास रहा है। फिर वो चाहे जोसेफ स्टालिन हो या वर्तमान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। रूस की राजनीति में ऐसा होने के पीछे दो वजहे मुख्य हैं, जिनमें पहली वह सत्ता में बने रहने के दौरान किए गए भ्रष्टाचार के लिए जेल जाने से बचना और दूसरी वजह जान जाने का खतरा।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पिछले 20 सालों से रूस की सत्ता पर काबिज हैं। पुतिन के अलावा जोसेफ स्टालिन ही हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा समय तक रूस की सत्ता संभाली। स्टालिन तीन दशक तक रूस की सत्ता पर काबिज रहे।
दूसरी तरफ, हाल ही में रूस में संविधान संशोधन के लिए जनमत संग्रह करवाया गया। एक सप्ताह तक चले इस मतदान में लोगों ने पुतिन को 2036 तक राष्ट्रपति बने रहने की मंजूरी दे दी। पुतिन साल 2024 तक रूस के राष्ट्रपति पद पर रहने वाले थे। लेकिन अब संशोधन के बाद वह 83 वर्ष की उम्र तक रूस की सत्ता संभालते रहेंगे।
इससे पहले, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी 2018 में संविधान संशोधन किया और खुद को आजीवन राष्ट्रपति बनाने का रास्ता साफ कर लिया। दूसरी तरफ, रूस में कई लोगों ने संविधान संशोधन पर सवाल उठाया है।
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ऐसे लोगों का कहना है कि संविधान संशोधन महज एक दिखावा था, ये इसलिए किया गया ताकि पुतिन जनता के सवालों से बच जाएं। संशोधन से पहले ही सोशल मीडिया पर इसकी प्रतियां वायरल हो रही थी।
बता दें कि, टाइम मैग्जीन ने साल 2007 में पुतिन को 'पर्सन ऑफ द ईयर' चुना था। इसके अलावा फोर्ब्स ने पुतिन को 2013 से 2016 तक चार साल लगातार दुनिया का सबसे शक्तिशाली नेता चुना था।
पुतिन को लेकर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का मानना है कि उनके राज में रूस में आर्थिक तरक्की तो हुई है, लेकिन मानवाधिकर, लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में वह देश को पीछे ले गए।