रूस ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निर्देशों के बाद परमाणु परीक्षण की तैयारी शुरू कर दी है। विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बताया कि सभी संबंधित एजेंसियां इस पर काम कर रही हैं। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद उठाया गया है।
रूस ने परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करने की दिशा में औपचारिक कदम बढ़ा दिए हैं। विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शनिवार को बताया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निर्देशों के तहत परमाणु परीक्षण की संभावना पर काम शुरू हो गया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह कहा था कि अमेरिका अपने परमाणु हथियारों का परीक्षण फिर से शुरू करेगा।
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लावरोव ने बताया कि पांच नवंबर को राष्ट्रपति पुतिन ने रूस की सुरक्षा परिषद की बैठक में विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, खुफिया एजेंसियों और नागरिक विभागों को यह निर्देश दिया था कि अगर अमेरिका व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि से पीछे हटता है, तो रूस भी परमाणु परीक्षण की तैयारी करे। उन्होंने कहा कि यह कार्य क्रियान्वयन के लिए स्वीकार कर लिया गया है और संबंधित एजेंसियां इस पर काम कर रही हैं।
लावरोव का बयान और रूस की स्थिति
लावरोव ने कहा कि रूस फिलहाल इस प्रक्रिया को तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर परख रहा है और जनता को समय आने पर परिणामों से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस केवल तभी परमाणु परीक्षण करेगा जब अमेरिका पहले कदम उठाएगा। लावरोव ने बताया कि अब तक अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं मिला है।
अमेरिका की नई घोषणा और वैश्विक चिंता
ट्रंप ने हाल ही में यह घोषणा की थी कि अमेरिका तीन दशकों के अंतराल के बाद अपने परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करेगा। उन्होंने कहा था कि वाशिंगटन अब बराबरी के आधार पर चीन और रूस जैसे प्रतिद्वंद्वियों के साथ परमाणु क्षमता को परखेगा। ट्रंप की इस घोषणा से वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इससे परमाणु हथियारों की नई होड़ शुरू होने की आशंका जताई जा रही है।
रूस-चीन समीकरण और वैश्विक प्रभाव
विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप की घोषणा और रूस की प्रतिक्रिया अंतरराष्ट्रीय संतुलन को फिर से तनावपूर्ण बना सकती है। रूस और चीन हाल के वर्षों में अपने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर चुके हैं। ऐसे में परमाणु परीक्षणों की पुनः शुरुआत से अमेरिका के लिए नई कूटनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है। पुतिन ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका अपने परमाणु हथियारों का परीक्षण करता है, तो रूस पीछे नहीं रहेगा। यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि वैश्विक परमाणु संतुलन एक बार फिर अस्थिर हो सकता है।