अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता के विफल होने के एक दिन बाद तालिबान शासन ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों के कुछ तत्व जानबूझकर वार्ता प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं। वार्ता का मकसद सीमा तनाव को कम करना था।
तालिबान के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि ये तत्व पाकिस्तान की अंदरूनी समस्याओं, असुरक्षा और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के हमलों के लिए तालिबान सरकार को दोषी ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। मुजाहिद ने यह भी स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान किसी को भी अपनी जमीन का उपयोग दूसरे देश के खिलाफ करने की अनुमति नहीं देगा और न ही अपनी संप्रभुता या सुरक्षा को कमजोर करने वाली कोई कार्रवाई स्वीकार करेगा।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच शांति वार्ता इस्तांबुल में बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। ये वार्ता सीमा तनाव का स्थायी समाधान खोजने और अस्थिर संघर्ष विराम को जारी रखने के लिए आयोजित की गई थी।
तालिबान प्रवक्ता ने ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों के कुछ तत्व जानबूझकर जारी शांति प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का गैर-जिम्मेदार और असहयोग वाला रवैया किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचने का कारण बना, जबकि इस्लामी अमीरात की अच्छी मंशा और प्रयास थे।
ये भी पढ़ें:
'अब तक 69 हजार से अधिक फलस्तीनियों की मौत...', गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने की पुष्टि
2021 के बाद का सबसे खूनी संघर्ष
दोनों देशों के बीच सीमा संघर्ष तब शुरू हुआ, जब पाकिस्तान ने काबुल पर हवाई हमला किया। अफगानिस्तान ने इस हमले का कड़ा जवाब दिया, जिससे तनाव और बढ़ गया। यह घटनाक्रम उस समय हुआ, जब अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी पिछले महीने भारत में थे। 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद यह सबसे खूनी झड़पें थीं।
'टीटीपी का तालिबान प्रशासन से कोई संबंध नहीं'
कतर और तुर्किये की मध्यस्थता में वार्ता के बाद 19 अक्तूबर को दोनों पक्षों ने संघर्ष विराम पर सहमति दी थी। पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि काबुल में तालिबान टीटीपी को सुरक्षित पनाह देता है, जिसने पाकिस्तानी सैनिकों पर हमले किए। वहीं, तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि टीटीपी का मुद्दा पुराना है। यह समूह 2002 में बना था और मौजूदा तालिबान प्रशासन से इसका कोई संबंध नहीं है।
'तालिबान प्रतिनिधिमंडल ने पेश किए सबूत'
मुजाहिद ने कहा कि टीटीपी अमेरिका की ओर से बमबारी और पाकिस्तान के कबीलाई क्षेत्रों में ड्रोन हमलों के बाद उभरा। उन्होंने दावा किया कि इन कार्रवाइयों को इस्लामाबाद की अनुमति के बाद अंजाम दिया गया था। उन्होंने कहा कि इस्तांबुल में तीसरे दौर की वार्ता के दौरान तालिबान प्रतिनिधिमंडल ने सबूत पेश किए, जिनमें दिखाया गया कि टीटीपी के खिलाफ पाकिस्तान की कई बार सैन्य कार्रवाई के कारण हजारों लोग कबीलाई क्षेत्रों से विस्थापित हुए और कईयों ने अफगानिस्तान में शरण ली।
ये भी पढ़ें:
'कनाडा को ब्रिटिश जासूसों ने सौंपी थी निज्जर हत्याकांड की खुफिया जानकारी...', डॉक्यूमेंट्री में दावा
भविष्य में कोई बैठक नहीं होगी: ख्वाजा आसिफ
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस्लामाबाद में कहा कि अफगानिस्तान के साथ वार्ता खत्म हो गई है और भविष्य में कोई बैठक नहीं होगी। उन्होंने कहा, हम खाली हाथ लौटे, जिससे यह स्पष्ट है कि अब मध्यस्थों को भी अफगान तालिबान में कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि चौथे दौर की वार्ता की कोई योजना या उम्मीद नहीं है। वार्ता अनिश्चितकालीन विराम में चली गई है।