यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण अब रूस अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आर्थिक मॉडल को नया रूप देने की कोशिश में जुट गया है। वह अपने सुरक्षा संबंधों पर भी पुनर्विचार कर रहा है। इसके बीच चीन उसका सबसे बड़ा सहारा बन कर उभरा है। रूसी विशेषज्ञों ने अपना ये आकलन रूसी मीडिया में छपी अपनी टिप्पणियों में पेश किया है।
रूस की इकोनॉमिक्स नेशनल रिसर्च यूनिवर्सिटी में स्थित- सेंटर फॉर कॉम्प्रिहेंसिव यूरोपियन एंड इंटरनेशनल स्टडीज के निदेशक वेसिली कशिन ने अपनी एक टिप्पणी में कहा है- ‘चीन ने तटस्थता का रुख अपनाया है। लेकिन मौजूदा संकट के बीच यह रूस के प्रति दोस्ताना रुख है। चीन के विदेश मंत्रालय और चीनी बैंकों के अधिकारियों ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि मौजूदा हालात के बावजूद वे रूस के साथ अपने सभी संबंध बनाए रखेंगे।’
रूसी मीडिया में छपी टिप्पणियों से साफ है कि रूसी रणनीतिकारों ने इन अमेरिकी बयानों को बिल्कुल अहमियत नहीं दी है कि यूक्रेन मसले पर अमेरिका और चीन के बीच विचार-विमर्श चल रहा है। उन्होंने इन खबरों को भी गंभीरता से नहीं लिया है कि पश्चिमी देशों के संभावित प्रतिबंधों के डर से चीनी कंपनियां और बैंक रूस के साथ कारोबार करने में हिचक रही हैं। इन टिप्पणियों में कहा गया है कि प्रतिबंधों के असर को लेकर चिंतित होना एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। लेकिन इन चिंताओं के बावजूद चीनी कंपनियां रूस से कारोबार जारी रखने के रास्ते ढूंढ लेंगी।
वेसिली कशिन ने ध्यान दिलाया है कि यूक्रेन संकट खड़ा होने के बाद चीन और रूस ने ऐसे सुरक्षित तंत्र खड़ा करने की ठोस पहल की है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार जारी रहे। अब दोनों देश रूसी मुद्रा रुबल और चीनी मुद्रा युवान में आपसी कारोबार करने के उपायों को लागू कर चुके हैं। पश्चिमी प्रतिबंध लगने के बाद रूसी विदेशी मुद्रा भंडार में युवान का हिस्सा तेजी से बढ़ा है।