भारत की तरफ से सिंधु जल समझौता निलंबित किए जाने के बाद पाकिस्तानियों, खासकर किसानों को अपने देश के रेगिस्तान में तब्दील होने का खतरा सताने लगा है। इसी समझौते के कारण पाकिस्तान के 80 प्रतिशत किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो पाता है। खासकर तब, जबकि हर साल मौसमी वर्षा कम होती जा रही है।
सिंधु नदी के किनारे पर स्थित जमीन में होमला ठाखुर ने सब्जियां लगा रखी हैं। वह उन पर कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं। सिंधु नदी में पानी कम है, लेकिन वही उनकी फसलों का एकमात्र सहारा है। स्प्रे गन में पानी भरने के लिए सिंधु नदी की तरफ जाने से पहले होमला (40) कहते हैं, अगर उन्होंने पानी रोक दिया तो यह सब कुछ थार रेगिस्तान में तब्दील हो जाएगा। पूरा देश रेगिस्तान बन जाएगा। हम भूखों मर जाएंगे। सिंध प्रांत के लतीफाबाद में नदी किनारे होमला की पांच एकड़ जमीन है। इसी प्रांत से होती हुई सिंधु नदी सागर में मिलती है। होमला की बात का आसपास के 15 से अधिक किसान समर्थन करते हैं।
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कुछ महीने में दिखने लगेगा असर
दोनों ही देशों के सरकारी अधिकारियों व विशेषज्ञों का मानना है कि भारत तत्काल सिंधु नदी के प्रवाह को नहीं रोकेगा। सिंधु समझौते के तहत भारत, पाकिस्तान के हिस्से वाली तीन नदियों सिंधु, झेलम व चेनाब पर सिर्फ जल विद्युत इकाइयों का निर्माण करा सकता है। डैम का निर्माण नहीं करा सकता। हालांकि, सिंधु जल समझौता के निलंबित होने का असर कुछ महीनों दिखने लगेगा। जल संसाधन मंत्री चंद्रकांत रघुनाथ पाटिल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सिंधु नदी का एक भी बूंद पाकिस्तान नहीं पहुंचे।
जलधारा में बदलाव कर अपने किसानों को पानी देगा भारत
भारत सरकार के दो अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नई दिल्ली कुछ महीनों के भीतर सिंधु की धारा में बदलाव करते हुए नहरों का निर्माण कराएग, जिससे पानी किसानों तक पहुंचेगा। इसके अलावा भारत डैम का निर्माण करा सकता है। हालांकि, इसमें चार से सात साल लग सकते हैं। भारत तत्काल प्रभाव से सिंधी जल आयोग के साथ नदी के प्रवाह के आंकड़ों को साझा करना बंद कर देगा। इसके अलावा बाढ़ की चेतावनी भी साझा करना बंद कर देगा और वार्षिक बैठकों में भी हिस्सा नहीं लेगा। भारत के केंद्रीय जल आयोग के पूर्व अध्यक्ष कुशविंदर वोहरा ने कहा कि इससे पाकिस्तान को योजनाओं बनाने व उनके क्रियान्वयन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
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खतरे को कम आंक रहा पाकिस्तानः वकार
ब्रिटेन की परामर्श फर्म ऑक्सफोर्ड पॉलिसी मैनेजमेंट के अर्थशास्त्री एवं टीम लीडर वकार अहमद ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के सिंधु संधि से अलग होने के खतरे को कम करके आंका है। उन्होंने कहा, भारत के पास जल प्रवाह को रोकने के लिए तत्काल बुनियादी ढांचा नहीं है, खासकर बाढ़ के समय। इसलिए यह अवधि पाकिस्तान के लिए अपने जल क्षेत्र में अक्षमताओं को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।
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