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अमेरिका: ट्रंप का कार्यकाल था न्यूज मीडिया का सुनहरा दौर! अब वेबसाइट्स को नहीं मिल रहे पाठक और चंदा

Mon, 08 Mar 2021 04:53 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

पिछले महीने ट्रेंड यह देखा गया लोगों ने शेयर मर्केट में हुए गेमस्टॉप घोटाले और कोरोना वायरस महामारी से जुड़ी खबरों में बाइडन प्रशासन से संबंधित खबरों की तुलना में ज्यादा रुचि ली। हालांकि वित्तीय और कारोबारी खबरों में भी दिलचस्पी घटी है, लेकिन यह गिरावट राजनीतिक खबरों में घटी रुचि की तुलना में कम है...
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डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद से हटने का एक बड़ा नुकसान न्यूज मीडिया को उठाना पड़ रहा है। खासकर लिबरल मीडिया के लिए मुश्किलें खड़ी हुई हैं। ये मीडिया का वो हिस्सा है, जिसने ट्रंप के कार्यकाल के पूरे चार साल उनके खिलाफ मुहिम चलाई रखी। उस दौरान ट्रंप विरोधी टीवी चैनलों, अखबारों और वेबसाइटों के दर्शकों-पाठकों में बड़ा इजाफा हुआ। बहुत सी वेबसाइटों को लगातार बड़े पैमाने पर चंदा भी मिलता रहा। लेकिन ट्रंप के व्हाइट हाउस से विदा होने के पहले 50 दिन में ही उनके व्यूअरशिप (दर्शक-पाठक संख्य़ा) और चंदे दोनों में गिरावट आई है।

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इंटरसेप्ट, कॉमनड्रीम आदि जैसी लिबरल-वामपंथी वेबसाइटों ने बकायदा इस बात को स्वीकार किया है। उन्होंने लोगों से चंदा देना जारी रखने की अपील की है। इस बीच खबरों के बाजार का विश्लेषण करने वाली संस्थाओं सिमिलरवेब और न्यूजह्विप के ताजा आंकड़ों से भी इस बात की पुष्टि हुई है कि ट्रंप के व्हाइट हाउस से जाने के बाद अमेरिका में लोगों की राजनीतिक खबरों में दिलचस्पी घट गई है। विश्लेषकों ने कहा है कि ट्रंप खबरों के केंद्र में खुद को रखने की कला में माहिर थे। इससे उनके विरोधी और समर्थक दोनों लगातार राजनीतिक खबरों को फॉलो करते थे।

सिमिलरवेब के मुताबिक जनवरी में कैपिटल हिल (अमेरिकी संसद भवन) पर ट्रंप समर्थकों के हमले के बाद न्यूज वेबसाइट्स पर ट्रैफिक में भारी उछाल आया। लगभग पूरी जनवरी लोगों की ये दिलचस्पी बनी रही। लेकिन फरवरी में सभी बड़ी न्यूज वेबसाइटों पर आने वाले पाठकों की संख्या में 20 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। राजनीतिक खबरों पर होने वाले क्लिक में ये गिरावट 28 फीसदी दर्ज की गई है।
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इसका एक अर्थ यह भी निकाला गया है कि जो बाइडन के दौर में राष्ट्रपति पद में ही लोगों की दिलचस्पी घटी है। न्यूजह्विप के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में भी ट्रंप के ऊपर बाइडन की तुलना में तीन गुना ज्यादा खबरें लिखी गईं। टीवी चैनलों की खबरों का विश्लेषण करने वाली एजेंसी- स्टैनफॉर्ड केबल न्यूज एनालाइजर के मुताबिक पिछले महीने टीवी चैनलों पर बाइडन के बारे में अनुमानतया 1,836 मिनट की चर्चा हुई। जबकि 2017 में जब ट्रंप राष्ट्रपति बने थे, तब फरवरी में उनके बारे में अनुमानतया 4,669 मिनट चर्चा हुई थी।

पिछले महीने ट्रेंड यह देखा गया लोगों ने शेयर मर्केट में हुए गेमस्टॉप घोटाले और कोरोना वायरस महामारी से जुड़ी खबरों में बाइडन प्रशासन से संबंधित खबरों की तुलना में ज्यादा रुचि ली। हालांकि वित्तीय और कारोबारी खबरों में भी दिलचस्पी घटी है, लेकिन यह गिरावट राजनीतिक खबरों में घटी रुचि की तुलना में कम है।

मीडिया विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर ट्रंप फिर से अपनी राजनीतिक मुहिम शुरू करते हैं, तो राजनीतिक खबरों में लोगों की रुचि फिर से बढ़ सकती है। 28 फरवरी को ट्रंप ने जब कंजरवेटिव पॉलिटिकल एक्शन कांफ्रेंस में भाषण दिया, तो उनके भाषण को 70 लाख लोगों ने लाइव देखा। इस घटना को लगभग उतनी दर्शक संख्या मिली, जितनी गोल्डन ग्लोब फिल्म पुरस्कार वितरण समारोह के लाइव प्रसारण को मिली।

उधर ट्रंप समर्थक वेबसाइटों के दर्शकों में भी गिरावट आई है, लेकिन ताजा आंकड़े बताते हैं कि इन साइटों ने अपना एक मजबूत आधार बना लिया है। मसलन, न्यूजमैक्स वेबसाइट पर फरवरी में जनवरी की तुलना में कम लोग आए, फिर ये संख्या तीन साल पहले के ट्रैफिक से 179 गुना ज्यादा थी। क्यूएनॉन और गेटवेपंडित वेबसाइटों पर भी तीन साल पहले की तुलना में क्रमशः 157 फीसदी और 70 फीसदी ज्यादा लोग फरवरी में आए। विश्लेषकों का कहना है कि इन आंकड़ों से जाहिर यह होता है कि सामाजिक ध्रुवीकरण पैदा करने वाली और नाटकीय खबरें ज्यादा बिकती हैं। इस कारण कई जानकार ट्रंप के दौर को न्यूज मीडिया के लिए सुनहरा दौर मानते हैं।

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