अमेरिका में जिन सैकड़ों संघीय कर्मचारिों की नौकरियां चली गई थीं, अब उन्हें वापस काम पर बुलाया जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार रहे एलन मस्क की सरकारी खर्चों में कटौती करने की योजना के तहत इन कर्मचारियों को हटाया गया था।
सामान्य सेवा प्रशासन (जीएसए) ने इन कर्मचारियों को कहा कि इस हफ्त तक बताएं कि वे दोबारा नौकरी करना चाहते हैं या नहीं। ये कर्मचारी सरकारी दफ्तरों में देखभाल का काम करते थे। सरकारी नोटिस के मुताबिक, जो कर्मचारी लौटने को तैयार हैं, उन्हें छह अक्तूबर से काम पर लौटना होगा। इन सात महीनों में वे काम पर नहीं थे, लेकिन उन्हें वेतन मिलता रहा। इस दौरान जीएसए को कई सरकारी इमारतों के किराए पर भारी खर्च उठाना पड़ा। इसका बोझ आखिरकार करदाताओं पर ही पड़ा।
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जीएसए के एक पूर्व अधिकारी चाड बेकर ने कहा कि एजेंसी में कर्मचारियों की भारी कमी हो गई थी और बुनियादी काम भी सही तरीके से नहीं हो पा रहे थे। अब एजेंसी को आपातकालीन स्थिति में चलाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मस्क और उनके सरकारी दक्षता विभाग (डॉज) ने बहुत जल्दी ज्यादा कटौती कर दी थी। जीएसए को 1940 के दशक में स्थापित किया गया था, ताकि सरकारी दफ्तरों को खरीदने और उनका प्रबंधन करने का सारा काम एक ही जगह से किया जा सके।
कर्मचारियों को फिर से वापस काम पर बुलाने का फैसला केवल जीएसए में ही नहीं, बल्कि अन्य एजेंसियों में भी देखने को मिल रहा है। आयकर विभाग और श्रम विभाग ने भी कुछ पुराने कर्मचारियों को फिर से काम पर रखा है। राष्ट्रीय पार्क सेवा ने भी कुछ लोगों को वापस बुलाया है।
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जीएसए के लिए स्थिति संभालना जरूरी हो गया था, क्योंकि मार्च से हजारों कर्मचारियों ने या तो खुद सेवानिवृत्ति ले ली या उन्हें जबरन नौकरी छोड़ने को कहा गया। इसके अलावा, सैकड़ों कर्मचारियों को सीधे नौकरी से निकाल दिया गया। हालांकि, इन सभी को सितंबर के अंत तक वेतन मिलता रहा।
जीएसए ने इस फैसले पर विस्तार से कुछ नहीं कहा और न ही कर्मचारियों की संख्या या खर्च को लेकर जानकारी दी। केवल इतना कहा गया कि जीएसए नेतृत्व ने कर्मचारियों से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की है और जो भी निर्णय लिया गया है, वह ग्राहक एजेंसियों और करदाताओं के हित में है।
इस फैसले को लेकर एरिजोना से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद ग्रेग स्टैंटन ने कहा कि ऐसी कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है कि इन कटौतियों से सरकार ने कोई बचत की है। इसके विपरीत, इससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई और लोगों की सेवाएं प्रभावित हुईं।