यमन की महिला फोटोग्राफर बुशरा अलमत्वकल की प्रस्तुति
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तालिबान राज में कैसी होगी महिलाओं की जिंदगी यह सवाल अभी हर किसी के जेहन में घूम रहा है। खासकर महिला संगठनों को इस बात की चिंता है कि तालिबान अफगान महिलाओं की जिंदगी नरक के समान बना सकते हैं। भले ही तालिबान ने यह कहा कि वह महिलाओं को काम करने की आजादी देगा, उन्हें पढ़ने की आजादी देगा लेकिन तालिबान के इतिहास को देखते हुए किसी को उस पर भरोसा नहीं है।
महिलाओं को लेकर दुनिया के इसी डर को यमन की पहली मान्यता प्राप्त महिला फ़ोटोग्राफ़र बुशरा अलमत्वकल ने भी अपने कैमरे से पहचाना है। बुशरा अपनी प्रतिभा के दम पर अक्सर महिला अधिकारों के मुद्दे को उठाती रही हैं। 1969 में साना, यमन में जन्मी बुशरा अलमुतावकेल ने यूएसए और यमन में अध्ययन किया। छात्र जीवन के दौरान ही उन्हें फोटोग्राफी में रुचि हो गई थी। वे कई साल से फोटोग्राफी कर रही हैं लेकिन हाल में अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होने के बाद वे अफगान महिलाओं की स्थिति को लेकर वे अपनी चिंता जाहिर कर रही हैं। वे इस फोटो के जरिए महिला अधिकार और महिलाओं की आजादी की बात कर रही हैं।
खौफ के साए में अफगान महिलाएं
महिला संगठनों का डर गलत भी नहीं है क्योंकि तालिबान के कब्जे के बाद से अफगान महिलाओं ने घर से निकलना बंद कर दिया है, वे बुर्के में नजर आने लगी हैं। अफगानिस्तान की टीवी पत्रकार शबनम दावरान को तालिबान ने काम करने से रोक दिया है। अमेरिकी मीडिया हाउस सीएनएन चीफ इंटरनेशनल रिपोर्टर क्लैरिसा वार्ड हिजाब में रिपोर्टिंग करने केलिए मजबूर होना पड़ा।
तालिबान ने अफगानिस्तान की पहली महिला गर्वनर सलीमा मजारी को पकड़ लिया गया है। सलीमा तालिबान के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने वालों में आगे रही हैं। ब्यूटी पार्लर, दुकानों से महिला मॉडल की तस्वीरों की पुताई कर दी गई है। अंतराराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक अफगान महिलाएं अभी खौफ के साए में जी रही हैं और उन्हें अपनी आजादी छाने का सबसे ज्यादा खतरा नजर आ रहा है।