कट्टर इस्लामी संगठन तालिबान ने बीते दिनों अफगानिस्तान का नियंत्रण अपने कब्जे में ले लिया था। इससे पहले देश में कई महीनों तक भीषण हिंसा का दौर चला था जिसमें कई आम नागरिक, पत्रकार, नेता, कार्यकर्ता और सरकारी अधिकारियों की हत्या कर दी गई थी। तालिबान के राजधानी काबुल में दाखिल होने और राष्ट्रपति भवन पर कब्जा करने के बाद पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद लगा था कि इस युद्धग्रस्त देश में लड़ाई का दौर अब खत्म हो गया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
60 तालिबानी लड़ाकों के मारे जाने की खबर
अफगान मीडिया के अनुसार देश के तीन जिलों में स्थानीय निवासियों ने तालिबानियों को टक्कर देते हुए जिलों को आजाद करा लिया है। बगलान प्रांत के बानू, पोल-ए-हेसार और देह-ए-सलाह जिलों में एक बार फिर लोगों ने अफगानी झंडा फहरा दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस दौरान लोगों और तालिबानियों के बीच भीषण लड़ाई हुई जिसमें करीब 60 तालिबानी लड़ाकों के मारे जाने और कई अन्य के घायल होने की खबर है। जानकारों का कहना है कि यह घटना एक और बड़ी लड़ाई के लिए चिंगारी साबित हो सकती है।
कंधार और हेरात में भारतीय वाणिज्य दूतावासों पर बोला धावा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तालिबानी आतंकी ने कंधार और हेरात में भारतीय वाणिज्य दूतावासों के ताले तोड़कर उसमें घुसे और अहम दस्तावेज अपने साथ ले गए। दूतावास परिसर में खड़े कई वाहन भी आतंकी ले गए हैं। इससे पहले शुक्रवार को सामने आई एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट ने तालिबान के असली क्रूर चेहरे को बेनकाब कर दिया है। इसमें दावा किया गया कि तालिबान आतंकियों ने पिछले महीने गजनी प्रांत पर कब्जा करने के बाद मुंदरख्त गांव में हजारा समुदाय के नौ लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इनमें से तीन लोगों को घोर यातना देकर मारा था।