पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव के बीच तालिबानी गृहमंत्री ने पाकिस्तानी पार्टी JUI-F की खुलकर तारीफ की है। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई और शरणार्थियों की नीति पर सवाल उठाए। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या पाकिस्तानी उलेमा अब शहबाज और मुनीर के खिलाफ हो रहे है?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अफगानिस्तान के अंतरिम तालिबानी शासन के गृहमंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी का बड़ा बयान सामने आया है। रविवार को काबुल में एक कार्यक्रम के दौरान हक्कानी ने पाकिस्तान समेत उन सभी संगठनों और नेताओं का आभार जताया, जो अफगानिस्तान के प्रति सकारात्मक सोच और सहयोग का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने खास तौर पर पाकिस्तानी पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल (JUI-F) और उसके प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान की भूमिका की सराहना की, जिन्होंने दोनों देशों से संवाद और शांति बनाए रखने की अपील की थी।
गृहमंत्री हक्कानी ने आगे कहा कि अफगानिस्तान शांति, स्थिरता और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और अफगान लोग किसी देश या समुदाय को नुकसान पहुंचाना नहीं चाहते। उन्होंने सभी से कहा कि अफगानिस्तान अब अपने देश को फिर से बनाने और विकसित करने के रास्ते पर है और बाकी देशों को इसमें साथ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के बारे में गलत सोच और नकारात्मक इरादों को छोड़ देना चाहिए।
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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव
गौरतलब है कि हाल के समय में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। इसका मुख्य कारण पाकिस्तान में प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) है। दोनों देशों के बीच हुए संघर्ष को क्रमबद्ध तरीके से समझने की कोशिश करें तो बीते 11 अक्तूबर को दोनों देशों के बीच सीमा पर झड़पें हुई थीं। इसके बाद 15 अक्तूबर को अस्थायी संघर्ष विराम हुआ और दोबारा बातचीत शुरू की गई।
फिर 25 अक्तूबर को इस्तांबुल में दूसरी बातचीत हुई, लेकिन 29 अक्तूबर को पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तारार ने कहा कि बातचीत सफल नहीं रही। दूसरी ओर तुर्किय और कतर ने बीच-बचाव किया और 31 अक्तूबर को एक संयुक्त बयान जारी हुआ। इसमें कहा गया कि 6 नवंबर को मुख्य बैठक में आगे की कार्ययोजना तय की जाएगी। लेकिन तीसरी बैठक के बाद, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद को लेकर बातचीत अब अनिश्चितकालीन हो गई है। इसके बाद अफगान तालिबान ने पाकिस्तान के साथ व्यापारिक संबंध रोक दिए और पाकिस्तान ने पहले ही सीमा बंद कर दी थी।
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