विशेष अदालत के न्यायाधीश अबुआल हसनत जुल्करनैन ने अदालत के आदेश के बावजूद इमरान खान और उनके बेटों के बीच फोन पर बातचीत की व्यवस्था करने में विफल रहने पर सोमवार को अदियाला जेल के अधीक्षक को नोटिस जारी किया। 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' अखबार ने बुधवार को खबर दी कि अदालत को दिए अपने जवाब में जेल के वरिष्ठ अधिकारी ने अपदस्थ प्रधानमंत्री को अपने बेटों से बात नहीं करने देने के लिए मंगलवार को माफी मांगी।
अखबार के मुताबिक, अधीक्षक ने अपने जवाब में कहा कि 18 अक्तूबर को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख को अपने बच्चों से बात करने में सक्षम बनाने के लिए विशेष उपाय किए गए थे, लेकिन जेल में अंतरराष्ट्रीय नंबरों पर व्हाट्सएप कॉल करने की कोई स्थायी सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि कॉल को जेल पीसीओ के माध्यम से निर्देशित किया जा सकता है जिसका इस्तेमाल अन्य कैदी परिवार और वकीलों से बात करने के लिए करते हैं।
हालांकि, अखबार की खबर के मुताबिक, आईजी जेल ने सरकारी गोपनीयता कानून में आरोपियों के लिए प्रोटोकॉल के संबंध में एक पत्र जारी किया और इसमें कहा गया है कि अधिनियम के तहत आरोपियों को आधिकारिक पीसीओ सुविधा उपलब्ध नहीं है।
अधीक्षक ने अदालत से अनुरोध किया कि उनके खिलाफ अवमानना का मामला खारिज कर दिया जाए क्योंकि वह अदालत के आदेश का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं। इमरान खान (71) को 26 सितंबर को जिला जेल अटक से वहां स्थानांतरित किया गया था और तब से वह रावलपिंडी की अदियाला जेल में हैं। उन्हें तोशाखाना मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद पांच अगस्त को गिरफ्तार किया गया था।