तो क्या महिलाएं पुरुषों के मुकाबले बेहतर ड्राइवर होती हैं?
इस सवाल के जवाब में गरिमा कहती हैं, "इन आंकड़ों से सीधे सीधे ऐसा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। ये आंकड़े केवल दिल्ली के उन इलाकों के हैं, जहां दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के जवान खड़े होते हैं। लेकिन कई जगह महिलाएं ड्राइविंग में गलती करने के बाद भी नहीं पकड़ी जाती। इसलिए ये आंकड़े पूरी तस्वीर बयां नहीं करते।"
कितनी महिलाएं गाड़ी चलाती हैं?
महिलाएं कैसी गाड़ी चलाती हैं ये जानने के लिए इसे भी जानना जरूरी है कि सड़क पर कितनी महिलाएं गाड़ी के साथ उतरती हैं। दिल्ली ट्रांसपोर्ट विभाग के आंकड़ों की मानें तो दिल्ली में 75 पुरुषों पर एक महिला
ड्राइवर हैं, जिनके पास गाड़ी चलाने का लाइसेंस है। दिल्ली में सिर्फ 11 फीसदी महिलाओं के नाम गाड़ी रजिस्टर हैं। ये दोनों आंकड़े अपने आप में ये बताने के लिए काफी हैं कि सड़क पर गाड़ी लेकर निकलने वाली महिलाओं की तादाद पुरुषों के मुकाबले कम है। इसलिए महिलाओं के नाम पर कटने वाले चालान भी कम हैं।
गरिमा आगे कहती हैं, "इतना जरूर है कि महिलाओं के मुकाबले पुरुष ज्यादा आक्रमक हो कर गाड़ी चलाते हैं। वो ज्यादातर दो पहिया गाड़ी चलाते हैं, जिसमें ट्रैफिक नियमों को तोड़ने के मौके भी ज्यादा होते हैं।" 2018 में अब तक के आंकड़े भी इसी तर्ज पर हैं। हर साल महिलाएं ट्रैफिक नियम कम तोड़ती हैं।
पूरी दुनिया में क्या है ट्रेंड ?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के 2016 के आंकड़ों के मुताबिक 5 करोड़ लोग हर साल सड़क हादसों के शिकार होते हैं, इनमें 10 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इसी रिपोर्ट में ये कहा गया है कि दुनिया में सबसे कम सड़क हादसे नॉर्वे में होते हैं। वहां सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या बहुत कम है।
2017 में नॉर्वे में हुए एक सर्वे में पाया गया है कि गाड़ी चलाते समय महिलाओं के मुकाबले पुरुष ड्राइवर का ध्यान ज्यादा भटकता है। नॉर्वे की संस्था ट्रांसपोर्ट इकोनॉमिक्स ने ये शोध 1100 लोगों पर किया।
एक दूसरा शोध ब्रिटेन के हाइड पार्क इलाके में हुआ है। हाइड पार्क चौराहा वहां का सबसे व्यस्तम चौराहा माना जाता है। वहां हुए एक सर्वे के मुताबिक महिलाएं ड्राइविंग में पुरुषों से कई मामले में बेहतर हैं। ये सर्वे ड्राइविंग के तरीके जैसे- गाड़ी की स्पीड, इंडिकेटर का इस्तेमाल, स्टियरिंग कंट्रोल, गाड़ी चलाते समय फोन पर बात करने जैसे पैमानों पर किया गया था। इस सर्वे में महिलाओं को 30 में 23.6 अंक मिले जबकि
पुरुषों को महज 19.8 अंक ही मिले।