भारत और यूएई ने मंगलवार को दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए, इनमें से एक समझौते में दोनों देशों ने सहमति बनाई है कि वे आपसी व्यापार में डॉलर के बजाय एक-दूसरे की मुद्रा में ही भुगतान कर पाएंगे। करेंसी स्वैप (अपनी मुद्राओं की अदला-बदली) को लेकर हुए इस समझौते से भारत को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से कच्चा तेल कम दामों में खरीदने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इन समझौतों पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के बीच व्यापार, सुरक्षा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर हुई लंबी चर्चा के दौरान हस्ताक्षर किए गए। स्वराज सोमवार को यहां पहुंची थीं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट से बताया कि यूएई-भारत ज्वाइंट कमीशन मीटिंग (जेसीएम) के दौरान व्यापक सामरिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए दोनों मंत्रियों के बीच ऊर्जा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, अंतरिक्ष, रक्षा व राजनयिक और कई अन्य विषयों पर लंबी चर्चा हुई। यह दोनों देशों के बीच आर्थिक व तकनीकी सहयोग बढ़ाने के लिए जेसीएम की 12वीं बैठक थी।
रवीश कुमार ने आगे ट्वीट किया, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के यूएई दौरे में बहुउद्देशीय सहयोग को दिशा देने के लिए संस्थागत तंत्र बनाने को लेकर दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इनमें से एक समझौता दोनों देशों के बीच करेंसी स्वैप को लेकर है और दूसरे के तहत दोनों देशों के बीच अफ्रीका में विकास परियोजनाओं में सहयोग के लिए एमओयू किया गया है।
बैठक से इतर विदेश मंत्री सुषमा ने अबू धाबी में महात्मा गांधी की 150वे जन्म वर्ष और आधुनिक यूएई के संस्थापक शेख जायद की जन्म शताब्दी के समारोह को समर्पित गांधी-जायद डिजिटल म्यूजियम का भी उद्घाटन किया।
यह ऐसा समझौता होता है, जो दोनों देशों को अपनी करेंसी में आयात व निर्यात के लिए पूर्व निर्धारित एक्सचेंज रेट पर भुगतान करने की छूट देता है। इसमें भुगतान के लिए डॉलर जैसी किसी तीसरी बेंचमार्क करेंसी को शामिल नहीं करना पड़ता।
इसलिए भारत को लाभ
50 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है फिलहाल दोनों देशों के बीच
05 शीर्ष देशों में आते हैं दोनों एक-दूसरे के लिए व्यापारिक लिहाज से
06 नंबर पर है यूएई तेल निर्यात करने वाले देशों में भारत के लिए
33 लाख भारतीय यूएई में रहकर कर रहे हैं नौकरी व व्यापार