यूएई स्थित पहले हिंदू मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर तैयारियां तेज हो गई है। पीएम मोदी 14 फरवरी को कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। मंदिर से जुड़े वीडियो में खूबसूरत नक्काशी देखने को मिल रही है। इस बीच, भारत में यूएई राजदूत अब्दुलनासिर अलशाली ने पीएम मोदी की यात्रा को खास माना है।
अबू धाबी स्थित पहले हिंदू मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को महज दो दिन बचे हैं। 14 फरवरी को पीएम मोदी कार्यक्रम में शामिल करेंगे। गौरतलब है कि मध्य पूर्व में पारंपरिक हिंदू वास्तुकला शैली में यह पहला पाषण निर्मित मंदिर होने जा रहा है, जिसका निर्माण बीएपीएस संस्था द्वारा किया गया है। अबूधाबी में स्थित यह भव्य मंदिर भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मैत्री, सांस्कृतिक सद्भाव और सहयोग की भावना का प्रतीक है। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से पहले मंदिर रोशनी से जगमग हो उठा है।
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40 हजार घन फुट संगमरमर का हुआ इस्तेमाल
गौरतलब है कि यूएई में तीन अन्य हिंदू मंदिर हैं जो दुबई में स्थित हैं। लेकिन बीएपीएस पूरे खाड़ी क्षेत्र में सबसे बड़ा मंदिर होगा। पत्थर की वास्तुकला के साथ एक बड़े इलाके में फैला बीएपीएस मंदिर खाड़ी क्षेत्र में सबसे बड़ा मंदिर होगा। प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार से संयुक्त अरब अमीरात की दो दिवसीय यात्रा करेंगे और इस दौरान 14 फरवरी को विशाल मंदिर का उद्घाटन करेंगे। खास बात है कि मंदिर के भीतर भाग के निर्माण में 40,000 घन फुट संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है।
पीएम मोदी के दौरे को लेकर उत्साह- अलशाली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा को लेकर यूएई खासा उत्साहित दिख रहा है। भारत में यूएई के राजदूत अब्दुलनासिर अलशाली ने सोमवार को उम्मीद जतदाई है कि यह दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। अलशाली ने कहा कि यह यात्रा बेहद खास है। हम इसको लेकर गौरवान्वित और सम्मानित महसूस कर रहे है। अलशाली ने कहा कि यूएई-भारत संबंध न केवल द्विपक्षीय अर्थों में बल्कि बहुपक्षीय बैठकों, सभाओं और जुड़ावों सहित सहयोग के अन्य सभी क्षेत्रों में भी रणनीतिक है।
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कहां स्थित है यह मंदिर?
मंदिर अबू धाबी में 'अल वाकबा' नाम की जगह पर 20,000 वर्ग मीटर की जमीन पर बना है। हाइवे से सटा अल वाकबा अबू धाबी से तकरीबन 30 मिनट की दूरी पर है। बता दें भारतीय दूतावास के आंकड़ों के मुताबिक, यूएई में तकरीबन 26 लाख भारतीय रहते हैं, जो वहां की आबादी का लगभग 30% हिस्सा है। मंदिर में नक्काशी के माध्यम से प्रामाणिक प्राचीन कला और वास्तुकला को पुनर्जीवित किया गया है। मंदिर प्रबंधन के एक प्रवक्ता अशोक कोटेचा ने बताया कि मास्टर प्लान के डिजाइन को 2020 की शुरुआत में पूरा किया गया था। ऐतिहासिक मंदिर का काम समुदाय के समर्थन, भारत और यूएई के नेतृत्व से आगे बढ़ रहा है।
बता दें यूएई सरकार ने अबू धाबी में मंदिर बनाने के लिए 20,000 वर्ग मीटर जमीन दी थी। यूएई सरकार ने साल 2015 में उस वक्त ऐलान किया था, जब प्रधानमंत्री मोदी दो दिवसीय दौरे पर वहां गए थे। संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबूधाबी में पहले हिंदू मंदिर बनकर तैयार हो गया है। मंदिर निर्माण में इको-फ्रेंडली तरीके पर जोर दिया जा रहा है। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 2018 में दुबई के दौरे पर वहां के ओपेरा हाउस से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था ने मंदिर की आधारशिला रखी थी।