श्रीलंका जैसी हालत दुनिया के कई अन्य देशों में भी पैदा हो सकती है। विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर श्रीलंका एक कंपनी होता, तो मौजूदा हाल में उसे दिवालिया घोषित कर दिया होता। यहां संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अधिकारियों के बीच यह राय बनी है कि श्रीलंका सिर्फ एक शुरुआत है। कई और देश उसी जैसी हालत का सामना कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी एजेंसी अंकटाड ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में कहा कि दुनिया में ऐसे 107 देश हैं, जो अनाज की महंगाई, ईंधन की महंगाई, और राजकोषीय संकट में से किसी ना किसी एक स्थिति का सामना कर रहे हैँ। 69 देश ऐसे हैं, जिनके सामने ये तीनों समस्याएं खड़ी हैं। इन 69 देशों में 25 अफ्रीका, 25 एशिया-प्रशांत और 19 लैटिन अमेरिका में हैँ।
अंकटाड के भूमंडलीकरण एवं विकास रणनीति प्रभाग के निदेशक रिचर्ड कोजुल-राइट ने बताया है- ‘देशों को अपनी घरेलू समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। लेकिन उन्हें लग रहे ज्यादातर झटकों का संबंध उन समस्याओं से नहीं है। महामारी और युद्ध के कारण उन्हें अधिक मात्रा में कर्ज लेना पड़ा है।’
संभावित संकट को देखते हुए ही आईएमएफ ने मिस्र, ट्यूनिशिया, और पाकिस्तान के लिए राहत पैकेज दिया है। अफ्रीकी देशों में जिन मुल्कों की हालत पर निकटता से नजर रखी जा रही है, उनमें घाना, केन्या, दक्षिण अफ्रीका, और इथियोपिया शामिल हैं। अर्जेंटीना के लिए भी हाल में आईएमएफ ने 45 बिलियन डॉलर का कर्ज मंजूर किया है। बताया जाता है कि एल सल्वाडोर और पेरु जैसे लैटिन अमेरिकी देश भी मुश्किल में हैं।
इस बीच टर्की की स्थिति का दिलचस्पी से अध्ययन किया जा रहा है। टर्की में सालाना मुद्रास्फीति दर 70 फीसदी तक पहुंच चुकी है। इसलिए समझा जा रहा था कि उसकी अर्थव्यवस्था सबसे पहले ढहेगी। लेकिन अभी तक टर्की में खाद्य पदार्थ लोगों की पहुंच से बाहर नहीं हुए हैं। बताया जाता है कि गैर-पारंपरिक उपायों का पालन करते हुए टर्की अब तक श्रीलंका जैसी हालत से बचा हुआ है।