आज ही के दिन सन 2001 में कुछ आत्मघाती हमलावरों ने यात्री विमानों का अपहरण कर पेंटागन और न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला किया था। पेंसिल्वेनिया में एक अपह्रत विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस घटना के 17 साल बाद आज भी न्यूयॉर्क की एक लैब (प्रयोगशाला) हादसे में मृत लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है। इस हमले में 2753 लोगों की मौत हो गई थी, वहीं अब भी करीब एक हजार मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।
न्यूयॉर्क की यह लैब डीएनए परीक्षण के माध्यम से मृतकों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। लैब में टि्वन टॉवर में मिले हडि्डयों के टुकड़ों का परीक्षण किया जा रहा है। यहां पहले हडि्डयों को साफ किया जाता है फिर टुकड़े-टुकड़े करने के बाद हडि्डयों को पाउडर के रूप में बदल दिया जाता है। फिर इसमें कुछ केमिकल मिलाकर इन्हें सेते हैं। इसके बाद इन्हें एक मशीन में डाला जाता है जो इसमें से परीक्षण योग्य डीएनए को निकालती है। लैब के एख परीक्षक का कहना है कि किसी हड्डी से डीएनए की पहचान करना कठिन काम होता है, ऊपर से यह काम तब और कठिन हो जाता है जब हडि्डयां धूल, बैक्टीरिया, जेट ईंधन और डीजल आदि के संपर्क में रही हों, इन परिस्थितियों में डीएनए नष्ट हो जाता है।
हमले के बाद घटनास्थल से करीब 22 हजार मानव अवशेष एकत्र किए गए थे। इन सबकी जांच की जा चुकी है। कुछ की जांच तो 10 से 15 बार तक की जा चुकी है, इसके बावजूद केवल 1642 की ही पहचान हो सकी है।
लैब में कार्यरत एक व्यक्ति के मुताबिक यह कोई उद्देश्यहीन कार्य नहीं है। इसी साल जुलाई में एक मृतक की पहचान की गई। उसका नाम माइकल जॉनसन था। 26 वर्षीय माइकल फाइनेंशियल एनालिस्ट था, वह साउथ टॉवर की 89वीं मजिल पर काम करता था। बताया कि माइकल की पहचान से एक साल पहले तक किसी की पहचान नहीं हो सकी थी।