नाम लिए बगैर पाकिस्तान पर तंज
जयशंकर ने कहा, ‘‘अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिए हमें सच्चे अर्थों में ‘दोहरी शांति’ यानी अफगानिस्तान के भीतर और इसके आस-पास अमन की आवश्यकता है। इसके लिए देश के भीतर और इसके आस-पास सभी के हित समान होने आवश्यक हैं।’’ इस सम्मेलन में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और अन्य नेताओं ने भी हिस्सा लिया।
जयशंकर ने नाम लिए बगैर पाकिस्तान पर निशाना साधा। विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘यदि शांति प्रक्रिया को सफल बनाना है, तो यह सुनिश्चित करना होगा कि वार्ता कर रहे पक्ष अच्छी नीयत और गंभीर प्रतिबद्धता के साथ बातचीत करें।’’जयशंकर ने कहा कि अफगानिस्तान में होने वाली हर घटना का पूरे क्षेत्र पर असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि वार्ता में भले ही काफी कुछ दांव पर है, लेकिन इससे निकलने वाले परिणाम बहुत महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘एक स्थिर, सम्प्रभु और शांतिपूर्ण अफगानिस्तान वास्तव में हमारे क्षेत्र में शांति एवं प्रगति का आधार है, इसलिए सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि यह आतंकवाद, हिंसक कट्टरपंथ, मादक पदार्थों एवं आपराधिक गिरोहों से मुक्त हो।’’
अफगान और तालिबान युद्ध में अभी तक हजारों की मौत
जयशंकर ने कहा, ‘‘हम आज एक ऐसा समावेशी अफगानिस्तान बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो दशकों के संघर्ष से पार पा सके, लेकिन ऐसा तभी संभव होगा, यदि हम उन सिद्धांतों के प्रति ईमानदार रहें, जो ‘हार्ट ऑफ एशिया’ का लंबे समय से हिस्सा रहे हैं। सामूहिक सफलता भले ही आसान नहीं हो, लेकिन इसका विकल्प केवल सामूहिक असफलता है।’’
अफगानिस्तान सरकार और तालिबान 19 साल से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए सीधे वार्ता कर रहे हैं। इस युद्ध में हजारों लोगों की जान चली गई और देश के कई हिस्से तबाह हो गए। भारत अफगानिस्तान में शांति एवं स्थिरता के प्रयासों में बड़ा भागीदार रहा है।
जयशंकर ने अफगानिस्तान में स्थिति पर ‘‘गंभीर चिंता जताते’’ हुए कहा कि ‘‘2021 में भी स्थिति बेहतर नहीं हुई है। अफगानिस्तान में विदेशी लड़ाकों की मौजूदगी खास तौर पर परेशान करने वाली है।’’ उन्होंने कहा कि ऐसे में ‘हार्ट आफ एशिया’ के सदस्यों एवं इसका समर्थन करने वाले देशों को हिंसा में तत्काल कमी लाने के लिए दबाव बनाने को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि स्थायी और समग्र संघर्षविराम हो सके।
अफगानिस्तान में दो दशक में उल्लेखनीय प्रगति
जयशंकर ने कहा कि अफगानिस्तान में पिछले दो दशक में हुई उल्लेखनीय प्रगति वह लोकतांत्रिक रूपरेखा है, जिसके तहत चुनाव कराए गए।
जयशंकर ने कहा , ‘‘हम ऐसे समय में मिल रहे हैं, जो न केवल अफगानिस्तान के लोगों के लिये बल्कि हमारे वृहद क्षेत्र के लिये भी महत्वपूर्ण है। अफगानिस्तान और इस वृहद क्षेत्र में जो कुछ घटित हो रहा है, उसे देखते हुए हमें ‘हार्ट आफ एशिया’ शब्दावली को हल्के में नहीं लेना चाहिए।’’
अफगानिस्तान के विकास में भारत का बड़ा योगदान
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में आम लोगों को निशाना बनाकर उनकी हत्या किए जाने की घटनाएं बढ़ी हैं और 2019 की तुलना में 2020 में नागरिकों की मौत के मामलों में 45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत परिवर्तन के इस दौर में अफगानिस्तान का पूरी तरह से समर्थन करने को प्रतिबद्ध है और उसने अफगानिस्तान के विकास में तीन अरब डॉलर का योगदान दिया है। काबुल के लिए और पेयजल का वादा भी इस सूची में शामिल है।
जयशंकर ने कहा कि हार्ट ऑफ एशिया-इस्तांबुल प्रक्रिया (एचओए-आईपी) के तहत व्यापार, वाणिज्य एवं निवेश सीबीएम में अग्रणी देश होने के नाते भारत अफगानिस्तान की बाहरी दुनिया के साथ कनेक्टविटी (संपर्क सुविधा) सुधारने के लिए काम करना जारी रखेगा। बता दें कि अफगानिस्तान पाकिस्तान पर आतंकवादियों को पनाहगाह देकर आतंकवाद एवं हिंसा को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है।