9/11 Terror Attack: जब अमेरिका ने आतंक का सबसे भयावह रूप देखा, चार घटनाओं में 2977 लोगों की हुई थी मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Mon, 11 Sep 2023 12:39 PM IST
सार
9/11 Terror Attack: 11 सितंबर 2001 की सुबह अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के टावरों को आतंकी हमले में ध्वस्त कर दिया गया था। इन हमलों में 2,977 लोगों की मौत हो गई थी और 6,000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। अमेरिका ने इस हमले का बदला लिया और अमेरिकी कमांडो ने एक ऑपरेशन में अलकायदा चीफ ओसामा बिन लादेन को मौत के घाट उतार दिया।
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला
- फोटो : AMAR UJALA
आज 9/11 आतंकी हमले की 22वीं वर्षी है। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका को अल कायदा ने वर्ष 2001 में आज ही के दिन विमान हमले से दहला दिया था। इस हमले में अमेरिका का वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। महज 102 मिनट में ही 2763 लोगों की जान चली गई थी।
आइये जानते हैं 9/11 आतंकी हमला क्या है? इसमें क्या हुआ था? हमलों के बाद क्या घटनाक्रम हुए? अमेरिका ने इसका बदला कैसे लिया?
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला
- फोटो : AMAR UJALA
आज 9/11 आतंकी हमले की 22वीं वर्षी है। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका को अल कायदा ने वर्ष 2001 में आज ही के दिन विमान हमले से दहला दिया था। इस हमले में अमेरिका का वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। महज 102 मिनट में ही 2763 लोगों की जान चली गई थी।
आइये जानते हैं 9/11 आतंकी हमला क्या है? इसमें क्या हुआ था? हमलों के बाद क्या घटनाक्रम हुए? अमेरिका ने इसका बदला कैसे लिया?
9/11 हमला
- फोटो : ANI
9/11 आतंकी हमला क्या है?
अल-कायदा के आतंकियों ने 11 सितंबर 2001 की सुबह चार विमानों को हाईजैक कर लिया था। इन सभी का मकसद विमानों को अलग-अलग ऐतिहासिक स्थलों पर क्रैश कराने का था। सबसे पहला क्रैश अमेरिकन एयरलाइन फ्लाइट 11 का हुआ था, जो कि न्यूयॉर्क शहर में सुबह 8.46 बजे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के उत्तरी टावर से टकराई थी। इसके 17 मिनट बाद ही यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट 175 बिल्डिंग के दक्षिणी टावर से टकराई।
हाई अलर्ट जारी होने के बावजूद सुबह 9.37 बजे अमेरिकन एयरलाइंस फ्लाइट 77 वॉशिंगटन स्थित अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन से टकराई। चौथे हाईजैक हुए विमान यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट 93 का लक्ष्य व्हाइट हाउस या यूएस कैपिटल बिल्डिंग को निशाना बनाने का था, लेकिन यात्रियों से भिड़ंत की वजह से आतंकियों के हाथ से विमान का नियंत्रण छूट गया और यह पेन्सिलवेनिया के शैंक्सविल में मैदानी इलाके में गिर गया।
9/11 को हुई इन चार घटनाओं में 2977 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 19 हाईजैकर भी शामिल रहे। जो लोग मारे गए उनमें चार विमानों में सवार 246 लोग, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और उसके आसपास के इलाके में 2606 लोग और पेंटागन में मौजूद 125 लोग शामिल थे। मारे गए ज्यादातर लोग आम नागरिक थे, लेकिन राहत और बचाव कार्य के दौरान 344 बचावकर्मी, 71 पुलिसकर्मी और 55 सैन्यकर्मी भी मारे गए थे।
9/11 हमला
- फोटो : सोशल मीडिया
हमलों के बाद क्या घटनाक्रम हुए?
बताया जाता है कि जिस वक्त अमेरिका में 9/11 के हमले हुए थे, उस वक्त राष्ट्रपति जॉर्ज बुश फ्लोरिडा में थे, लेकिन शाम सात बजे तक व्हाइट हाउस को सुरक्षित कर दिया गया और रात नौ बजे उन्होंने राष्ट्रपति भवन के ओवल ऑफिस से राष्ट्र के नाम संबोधन दिया।
11 सितंबर 2001: अल कायदा के 19 आतंकियों ने 4 विमान हाईजैक कर अमेरिका पर आत्मघाती हमला किया।
समय : सुबह 8:45 बजे
मंगलवार का दिन: अमेरिकी एयरलाइंस का बोइंग जिसमें 75708 लीटर जेट ईंधन था, वो न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के उत्तरी टॉवर से टकराया। 110 मंजिला इमारत की 80वीं मंजिल आग का गोला बन चुकी थी।
18 मिनट बाद: अमेरिकी विमान बोइंग-767 की फ्लाइट संख्या 175 अचानक आसमान से गायब हुआ। विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दक्षिणी टॉवर की 60वीं मंजिल से टकराया तब स्पष्ट हुआ कि ये आतंकी हमला है।
9:45 बजे: अमेरिकी एयरलाइंस का विमान 77 अमेरिकी सेना के हेड क्वार्टर पेंटागन के पश्चिमी हिस्से से टकराया। इसमें 125 सैन्यकर्मी और विमान में सवार 64 लोगों की जान गई थी।
9/11
- फोटो : SOCIAL MEDIA
पूरे अमेरिका में मच गया था कोहराम
स्टील और पत्थर के मजबूत ढांचे पर बने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का 321 किमी. गति की हवा और आग भी कुछ नहीं बिगाड़ सकती थी, लेकिन जेट फ्यूल ने उसे तबाह कर दिया। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दोनों टावर को ध्वस्त होते ही लोगों की चीख पुकार मच गई और उठते धूल के गुबार को पूरी दुनिया ने अपने टीवी सेट पर देखा था। अमेरिका में हुए इन हमलों में कुल 2,977 लोगों की मौत हो गई थी और 6,000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
ओसामा बिन लादेन
- फोटो : SOCIAL MEDIA
अमेरिका ने इसका बदला कैसे लिया?
बुश ने तत्कालीन उप राष्ट्रपति डिक चेनी से कहा था, ‘हम युद्ध के मैदान में हैं।’ उन्होंने अपने सहयोगियों से आगे कहा, ‘जब हम गुनहगारों को पकड़ेंगे तो वे मुझे पसंद नहीं आएंगे। उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।’ दिल दहला देने वाले इस हमले के पीछे अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन का हाथ था।
9/11 हमलों के बाद अमेरिका ने दुनियाभर से आतंकवाद को खत्म करने का बीड़ा उठा लिया। इसी सिलसिले में उसने लेबनान से लेकर इराक तक से आतंकी हमलों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। इस हमले का कनेक्शन आतंकी संगठन अल-कायदा से मिलने के बाद अमेरिका को जो जानकारी मिली, उसके मुताबिक, हमलों की साजिश अफगानिस्तान में रची गई और अल-कायदा के आतंकियों और गुट के सरगना ओसामा बिन-लादेन को अफगानिस्तान में कुछ साल पहले ही गठित हुई तालिबान सरकार का समर्थन हासिल था।
इस हमले के बाद राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने ओसामा बिन लादेन और उसके आतंकी संगठन अल कायदा को खत्म करने की ठान ली थी। इसके साथ ही अफगानिस्तान से तालिबानी शासन हटाने की कवायद भी तेज कर दी गई। राष्ट्रपति बुश ने अफगानिस्तान में अपनी सेनाएं भेजीं ताकि ओसामा और उसके साथियों का पता लगाया जा सके। लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल सकी। अरबों डॉलर फूंके जाने के बाद भी बुश खाली हाथ रहे। हालांकि तालिबान को जरूर एक बड़े हिस्से से उखाड़ फेंका गया। लेकिन लादेन हाथ नहीं आया।
आखिरकार बुश के बाद अमेरिका के नए राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासनकाल के दौरान लादेन को अमेरिका ने ढूंढ़ निकाला। दो मई 2011 की रात को दुनिया के खूंखार आतंकवादी ओसामा बिन लादेन का खात्मा हुआ था। पाकिस्तान के एबटाबाद में एक गुप्त कार्रवाई में उसे मार गिराया गया। इस तरह पूरे दस साल बाद अमेरिका ने 9/11 का बदला लिया।