दुनिया में पांच साल से कम उम्र के करीब 70 करोड़ बच्चों में एक तिहाई या तो कुपोषित हैं या मोटापे से जूझ रहे हैं। इसके चलते उन पर जीवन पर्यन्त स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त रहने का खतरा मंडरा रहा है। मंगलवार को जारी हुई संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दुनिया में 80 करोड़ से ज्यादा आबादी भुखमरी से पीड़ित है।
'ग्लोबल हंगर इंडेक्स' यानी जीएचआई में भारत इस बार और नीचे गिरकर 102वें रैंक पर आ पहुंचा है। दुर्भाग्य इसलिए भी कि इस सूची में कुल 117 देश ही हैं। यकीनन साल दर साल रैकिंग में आई गिरावट चिंताजनक है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स में पाकिस्तान 94वें स्थान पर है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स चार पैमानों पर देशों को परखता है। ये चार पैमाने- कुपोषण, शिशु मृत्यु दर, चाइल्ड वेस्टिंग और बच्चों की वृद्धि में रोक हैं।
यूनिसेफ के पोषण कार्यक्रम के प्रमुख विक्टर अगुआयो ने कहा कि, कुपोषण अहम सूक्ष्मपोषक तत्वों की कमी और मोटापे का तिहरा बोझ एक ही देश, कभी-कभी एक ही पड़ोसी और अक्सर एक ही घर में पाया जाता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ भोजन न मिलने से बच्चों में आयरन की कमी एनीमिया का कारण बनती है। इससे बच्चों में आईक्यू लेवल कम होता है। लेकिन आमतौर पर लोग इस पर ध्यान नहीं देते हैं।
एक तरफ सभी आयु वर्गों में विश्व के 80 करोड़ से अधिक लोग भुखमरी से पीड़ित हैं और अन्य दो अरब लोग अस्वस्थ खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन कर रहे हैं, जिसके कारण मोटापा, मधुमेह और हृदय संबंधी बीमारियां बढ़ रही है। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, छह माह से कम आयु के हर पांच में से केवल दो शिशुओं को ही केवल मां का दूध मिल रहा है। ‘फार्मूला मिल्क’ की बिक्री विश्व में 40 प्रतिशत बढ़ी है।