भारत में बीते वर्षों में कैंसर, डायबिटीज और हृदय रोगों का खतरा तेजी से बढ़ा है। वैसे तो क्रोनिक बीमारियों का खतरा पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ा है, लेकिन बड़ी आबादी की वजह से भारत में इससे प्रभावितों का आंकड़ा भी ज्यादा रहता है। बीते साल डालबर्ग की स्टेट ऑफ स्पोर्ट्स एंड फिजिकल एक्टिविटी (एसएपीए) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत में वयस्कों और किशोरों में इस तरह की क्रोनिक बीमारी की बड़ी वजह उनका सक्रिय जीवनशैली न अपनाना है। कई लोगों में शारीरिक सक्रियता विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के तय मानक से भी कम है।
इस बीच मेडिकल जर्नल लांसेट में छपी रिपोर्ट काफी उम्मीद बांधने वाली है। खासकर भारत में बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याओं के मद्देनजर। दरअसल, कुछ समय पहले तक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना था कि हल्की एक्सरसाइज, योग और लंबी दूरी तक चलना या दौड़ना कई स्वास्थ्य जोखिमों को कम कर देता है। हालांकि, हाल ही में आई दो रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हर दिन महज 7000 कदम चलने से ही कई क्रोनिक बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर लांसेट में छपी रिपोर्ट में रोजाना 7000 कदम चलने पर जोर क्यों दिया गया है? इस मामले में विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक क्या हैं? हर दिन 7000 कदम चलने से स्वास्थ्य समस्याएं किस तरह और कितनी कम हो सकती हैं? ज्यादा चलने के फायदे क्या हैं? और कम चलना क्यों नुकसानदेह है? आइये जानते हैं...
लांसेट की रिपोर्ट में 7000 कदम चलने पर क्या जानकारी?
लांसेट में छपी रिपोर्ट का शीर्षक- 'डेली स्टेप्स एंड हेल्थ आउटकम्स इन एडल्ट्स: अ सिस्टमैटिक रिव्यू एंड डोज-रिस्पॉन्स मेटा एनालिसिस' है। इसमें 1 लाख 60 हजार लोगों तक पर की गईं 57 स्टडीज का हवाला देते हुए हर दिन इंसानी गतिविधियों का विश्लेषण किया गया। इसमें सामने आया कि हर दिन 7000 कदम चलना स्वास्थ्य को बेहतर रखने का एक मानक यानी बेंचमार्क है। इससे स्वास्थ्य लाभ लेने के साथ एक हासिल कर सकने वाला लक्ष्य भी है। खासकर अगर इसकी तुलना 10 हजार कदमों के बेंचमार्क से करें, जिसे लेकर वैज्ञानिक स्टडीज में पुख्ता सबूत नहीं हैं।
लांसेट में जो रिपोर्ट छपी है उस स्टडी को ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी की तरफ से किया गया है। इसमें सामने आया है कि हर दिन 7000 कदम गंभीर स्वास्थ्य खतरों से बचाने में कारगर है। खासकर कैंसर, डिमेंशिया और हृदय रोगों से। इस स्टडी का नेतृत्व करने वाली यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी की महामारी विशेषज्ञ मेलोडी डिंग के मुताबिक, इससे न सिर्फ कई रोगों का खतरा कम होता है, बल्कि अगर कोई बीमारी नहीं है तो यह शारीरिक प्रणाली को फायदा पहुंचाने वाला मानक भी है। उन्होंने कहा कि रोजाना 7000 कदम से कम चलना कुछ स्वास्थ्य लाभ कम कर देता है, जबकि 7000 कदम से ज्यादा चलना उन स्वास्थ्य लाभों को बहुत ज्यादा नहीं बढ़ाता, बल्कि सिर्फ छोटी-मोटी बढ़ोतरी ही करता है।
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स्वास्थ्य जोखिम कम करने को लेकर क्या हैं WHO के मानक?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों में स्वास्थ्य जोखिम को कम करने के लिए चलने की जगह शारीरिक गतिविधियों पर ज्यादा जोर दिया गया है। खासकर एक्सरसाइज पर। डब्ल्यूएचओ ने इसके लिए गाइडलाइंस भी जारी की हैं, जिसके मुताबिक, वयस्कों को हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट मध्यम व्यायाम करना चाहिए या 75 मिनट जबरदस्त व्यायाम करना चाहिए। यह किसी भी तरह से हो सकता है- तैराकी से, चलने से, दौड़ने से, साइकलिंग से या अन्य किसी तरह से। यानी डब्ल्यूएचओ के मानक सिर्फ चलने या दौड़ने तक सीमित नहीं हैं।
तो क्या 10 हजार कदमों का मानक हवा-हवाई?
इस स्टडी का नेतृत्व करने वाली डॉक्टर डिंग ने साफ किया कि 10 हजार कदमों का मानक स्वास्थ्य की दुनिया में काफी प्रचलित है, लेकिन यह सबूत आधारित मानक नहीं है। 10 हजार कदमों का सीधा मतलब होगा हर दिन आठ किलोमीटर चलना। लेकिन यह लोगों की लंबाई, उनकी शारीरिक बनावट, चलने की गति आदि चीजों पर निर्भर करता है। ऐसे में यह उम्मीद करना कि हर कोई 10 हजार कदमों के मानक को छू लेगा और इसके बाद स्वास्थ्य लाभ लेगा, इसका औचित्य नहीं है। चलने के दौरान लंबे कदम और गति को स्वास्थ्य गतिविधियों के लिहाज से बड़ा फैक्टर माना जाता है।
बताया जाता है कि स्वास्थ्य लाभ के लिए 10 हजार कदमों के मानक की शुरुआत 1960 के दशक में एक मार्केटिंग अभियान की वजह से हुई थी। 1964 के टोक्यो ओलंपिक के दौरान 'पेडोमीटर' (कदमों की संख्या मापने वाले उपकरण) बनाने वाले एक ब्रांड- मैनपो-केई की लॉन्चिंग हुई थी। मैनपो-केई का अर्थ है- 10 हजार कदम मापने वाला मीटर। इस ब्रांड का नाम वायरल होने के बाद ओलंपिक से ही 10 हजार कदम के स्वास्थ्य मानक वाली चर्चा शुरू हुई और देखते ही देखते एक अनाधिकारिक दिशा-निर्देश बन गई। कई फिटनेस ट्रैकर्स और ऐप्स आज भी 10 हजार कदमों के लक्ष्य को ही मानक दिखाते हैं।
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7000 कदम के मानक पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
ब्रुनेई यूनिवर्सिटी, लंदन में स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर डेनियल बेली के मुताबिक, ताजा स्टडी सिर्फ एक मिथक है। 5000 से 7000 कदम को ज्यादा वास्तविक और हासिल कर सकने वाला लक्ष्य माना जाना चाहिए।
कुछ ऐसा ही कहना है ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न के सेंटर फॉर हेल्थ, एक्सरसाइज और स्पोर्ट्स मेडिसिन के निदेशक किम बेनेल का। बेनेल के मुताबिक, 10 हजार कदमों का मानक प्रमाण आधारित नहीं है। यानी स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए 10 हजार कदम ही चलना है यह जरूरी नहीं है। कम कदम भी फायदेमंद होते हैं और लोग इन लक्ष्यों को पा सकने के इरादे की वजह से इनसे लंबे समय तक जुड़े रह सकते हैं।