ईस्टर डे पर श्रीलंका में हुए आत्मघाती हमलों ने पूरे विश्व में आईएसआईएस के आतंक को फिर से ताजा कर दिया है। यह आतंकी संगठन सीरिया में अपनी जमीन खोने के बाद फिर से अपने वजूद को पाने का प्रयास कर रहा है।
हाल में ही जारी हुई एक रिपोर्ट में यह कहा गया है कि 'आईएस के आतंकी अपने-अपने देश लौट गए हैं और कई वर्षों तक अपने देश के लिए खतरा बने रहेंगे। इस रिपोर्ट के अनुसार 5600 आईएस आतंकी 33 अलग-अलग देश जा चुके हैं। सीरिया में 110 देशों के लगभग 40 हजार विदेशी आतंकी आईएस में शामिल होने पहुंचे थे। इनमें से बड़ी संख्या में विदेशी आतंकी सीरियन फौज के हाथों मारे भी गए थे।
जो लोग सीरिया नहीं जा पाए उनके लिए आईएस ने दूसरा प्लान बनाया। जिससे दुनिया भर के कई देशों में आतंकी हमलों में अचानक तेजी आ गई। इसमें फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम के अलावा कई अन्य यूरोपीय देश शामिल थे। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामिक स्टेट के गठन के बाद से 2017 तक दुनिया के 29 देशों में लगभग 143 आतंकी हमले हुए जिसमें 2000 से अधिक लोगों की मौत हो गई।
सबसे ज्यादा इन देशों से शामिल हुए आतंकी
सीरिया
- फोटो : FILE PHOTO
इस्लामिक स्टेट में शामिल होने वाले विदेशी आतंकियों मे रूस नंबर एक है। इसके बाद सऊदी अरब, जॉर्डन, ट्यूनीशिया और फ्रांस हैं। इसकी पुष्टि खुद कई सरकारों ने की है। अब अपने-अपने देश लौट रहे संदिग्ध आतंकियों पर संबंधित देश नजर बनाए हुए हैं।
खत्म हुआ स्वघोषित खलीफा शासन
अमेरिका समर्थित विद्रोही गुटों ने पूर्वी सीरिया के बागुज गांव में इस्लामिक स्टेट के कब्जे वाले आखिरी इलाके को मुक्त कराने के साथ ही आईएस पर जीत की घोषणा की थी।
कुर्द नेतृत्व वाले सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज के प्रवक्ता मुस्तफा बाली ने ट्वीट कर कहा, ‘बागुज आजाद हो गया और आईएस के खिलाफ सैन्य जीत हासिल कर ली गई है।’ ट्रंप ने भी कहा, ‘सीरिया अब आईएस से मुक्त हुआ।’आईएस के आखिरी गढ़ के खात्मे से आईएस के स्वघोषित खलीफा शासन का भी अंत हो गया।
इस आतंकी संगठन ने किया था आत्मघाती हमलों की शुरुआत
Sri Lanka’s ex-LTTE cadres
आत्मघाती हमलों को साल 1987 के आसपास सबसे पहले श्रीलंका की लिट्टे ने शुरू किया था। अपने मानव बम का उपयोग कर लिट्टे ने कई बड़े नेताओं की हत्या की। लिट्टे ने साल 1991 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और 1993 में चुनाव के दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार गमिनी दिसानायके की आत्मघाती हमलों में हत्या की थी।
अब भी जिंदा है इस्लामिक स्टेट की सोच
सीरिया में इस्लामिक स्टेट के खात्मे के बाद भी लोगों के अंदर नफरत और घृणा वाली सोच खत्म नहीं हुई है। कई आतंकी अमेरिका और सीरिया की सेना के हाथों मारे जा चुके हैं जबकि कई देश छोड़कर भाग गए हैं। लेकिन उनके परिवार के लोग अब भी यह स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं कि इस्लामिक स्टेट की विचारधारा और काम गलत थे।
सीरिया में इनके लिए बनाए गए कैंप में लगभग एक लाख संदिग्ध आईएस लड़ाकों के परिवार रहते हैं। जो आज भी कट्टरपंथी विचारधारा से ग्रस्त हैं। इन कैंपो मे आईएस का समर्थन करने वाले लोग बड़ी संख्या में मौजूद हैं जिनमें ज्यादातर महिलाएं हैं।
आरोप: गठबंधन सेना के हमलों में मारे गए हजारों आम नागरिक
syria bomb blast
विश्व मानवाधिकार संगठनों ने सीरिया में आईएस और अमेरिकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेना के बीच हुए संघर्ष की एक रिपोर्ट उजागर की है जिसमें इस युद्ध का बेहद ही घृणित चेहरा सामने आया है। यह रिपोर्ट वर्ष 2017 में जून से अक्तूबर के बीच पांच माह ही है जो बताती है कि इस अवधि में गठबंधन सेनाओं ने सीरिया में आईएस के खिलाफ जो अभियान चलाया उसमें 1600 आम नागरिकों की मौत हुई।
एमनेस्टी इंटरनेशनल और पर्यवेक्षक समूह एयरवॉर्स ने कहा है कि उन्होंने हमलों वाली 200 जगहों की जांच करके 1000 पीड़ितों की पहचान की है। जबकि अमेरिकी गठबंधन सेनाओं ने इस अभियान में सिर्फ 180 आम लोगों की मौत की पुष्टि की है। इसकी प्रतिक्रिया में इन मानवाधिकार संगठनों ने गठबंधन सेनाओं को स्पष्ट किया कि वे दो साल से इन मौतों को लेकर किया जा रहा खंडन बंद करें।