यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध का आज 34वां दिन है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों की बातचीत अब तुर्की में हो रही है। इस बैठक से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की के बीच बातचीत का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, बातचीत के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव में कमी नहीं आई है और रूस की ओर से यूक्रेन पर हमले का सिलसिला जारी है।
तुर्की में हुई बातचीत
आज यूक्रेन के शीर्ष वार्ताकार ने कहा कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच बैठक हो सके, इसके लिए युद्ध को समाप्त करने को लेकर मंगलवार को तुर्की में हुई बातचीत में पर्याप्त प्रगति हुई है। इससे पहले आज ये खबर भी सुर्खियों में रही कि पुतिन ने साफ तौर पर जेलेंस्की को बर्बाद करने की चेतावनी दी है। फिर खबर आई कि रूसी सेना कीव के आसपास सैन्य गतिविधियां कम करेगी। बहरहाल, समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर क्यों रूस ने सैन्य कार्रवाई में नरमी का संकेत दिया है।
पांच बिंदुओं में जानें क्यों रूस घटा रहा सैन्य गतिविधियां
- रूस ने कहा कि वह राजधानी कीव के आसपास सैन्य गतिविधियों को कम करेगा क्योंकि इस्तांबुल में सार्थक वार्ता हुई है और यूक्रेन के वार्ताकारों ने देश की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय गारंटी की मांग की है। तुर्की में हो रही बातचीत से ही पुतिन-जेलेंस्की वार्ता का दरवाजा खुल सकता है। इससे पहले दोनों देशों के वार्ताकारों के बीच बेलारूस में बाततचीत हो रही थी।
- यूक्रेनी सेना ने कीव के एक प्रमुख उपनगर पर फिर से कब्जा कर लिया और घिरे हुए मारियुपोल शहर पर नियंत्रण के करीब है। आंतरिक मंत्री डेनिस मोनास्टिर्स्की ने कहा कि सैनिकों ने इरपिन के उपनगरीय शहर को मुक्त किया है और रूसी नियंत्रण से राजधानी के उत्तर-पश्चिम में एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार को छीन लिया है। ये रूस के लिए बहुत बड़ा झटका है। वह पहले ही कीव के पास यूक्रेनी सेना से मात खा चुकी है।
- पश्चिमी विशेषज्ञों ने इरपिन के नुकसान को रूसी सेना के लिए एक महत्वपूर्ण झटका बताया है, जो राजधानी को घेरने के पहले असफल प्रयास के बाद भी फिर से संगठित होने की कोशिश कर रहे हैं। रूस के टैंकों के यूक्रेन में बर्बाद होने या कीव में लोकतांत्रिक सरकार को नेस्तनाबूत करने की उम्मीद को अब एक महीने से अधिक वक्त हो गया है। रूस ने कई शहर मिट्टी में मिला जरूर दिए, लेकिन यूक्रेन को घुटनों पर लाने का उसका सपना अब तक पूरा नहीं हो सका है।
- यूक्रेनी वार्ताकारों ने कहा है कि यूक्रेन ने तुर्की में रूस के साथ बातचीत में सुरक्षा गारंटी के बदले तटस्थ स्थिति अपनाने का प्रस्ताव रखा, जिसका मतलब है कि वह सैन्य गठबंधनों या सैन्य ठिकानों की मेजबानी नहीं करेगा। यूक्रेन के इस रुख ने भी रूस को नरमी बरतने पर मजबूर किया है।
- यूक्रेन ने एक अंतरराष्ट्रीय समझौते का आह्वान किया जिसके तहत अन्य देश नाटो सैन्य गठबंधन के अनुच्छेद 5 की तर्ज पर अपनी सुरक्षा की गारंटी देंगे। इनमें पोलैंड, इस्राइल, तुर्की और कनाडा संभावित सुरक्षा गारंटरों में से हो सकते हैं।