नेपाल के मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा
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नेपाल के प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ चल रहे वकीलों के अभियान का असर होने लगा है। सुप्रीम कोर्ट के जजों के भी खिलाफ हो जाने के कारण प्रधान न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा की स्थिति कमजोर पड़ती जा रही है। कोर्ट के 18 जजों ने गुरुवार को अपनी एक बैठक के दौरान जस्टिस राणा को रोस्टर प्रभारी पद से हटा दिया। इस तरह अब किस केस की सुनवाई कौन जज या कौन-सी बेंच करेगी, यह तय करने का अधिकार चीफ जस्टिस के हाथ से चला गया है। 18 जजों ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा कि अब ये निर्णय लॉटरी से होगा।
बार एसोसिएशन मांग रही इस्तीफा
जजों की बैठक में जस्टिस राणा शामिल नहीं हुए। जजों ने लॉटरी से निर्णय का फैसला एक दिसंबर से लागू करने का इरादा जताया है। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर प्रधान न्यायाधीश ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया, तो नेपाल में गहरा न्यायिक संकट खड़ा हो सकता है। इस बीच नेपाल बार एसोसिएशन अभी जस्टिस राणा से रोस्टर प्रभारी की जिम्मेदारी छीनने से संतुष्ट नहीं हुई है। वह राणा के इस्तीफे की मांग पर कायम है।
गुरुवार को एसोसिएशन से जुड़े वकीलों ने चीफ जस्टिस के इस्तीफे की अपनी मांग पर जोर डालने के लिए एक लंबा जुलूस निकाला। ये जुलूस सुप्रीम कोर्ट तक गया। विश्लेषकों की राय है कि सुप्रीम कोर्ट के जजों ने रोस्टर प्रभारी के बारे में निर्णय लेकर बीच का रास्ता का निकालने की कोशिश की है। वकीलों के आंदोलन के कारण सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई ठहरी हुई है। अब जजों ने फैसला किया है कि एक दिसंबर से वे सुनवाई शुरू करेंगे। जजों की तरफ से कहा गया है कि लॉटरी निकालने के वक्त चीफ जस्टिस भी मौजूद रहेंगे।
कानून के जानकारों का कहना है कि चीफ जस्टिस का लॉटरी प्रक्रिया का दर्शक बनना एक अभूतपूर्व स्थिति होगी। ऐसा पहली बार होगा कि चीफ जस्टिस किस केस की सुनवाई करें, इसे तय करने का अधिकार उन्हें नहीं होगा।
जस्टिस राणा का कोई फैसला मंजूर नहीं
उधर, नेपाल बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा है कि वे जस्टिस राणा को अब प्रधान न्यायाधीश नहीं मानते। दोनों संघों ने कहा- हमने जजों को बता दिया है कि जस्टिस राणा की तरफ से लिया गया कोई फैसला हमें मंजूर नहीं होगा। दोनों एसोसिएशनों ने कहा- अगर जस्टिस राणा ने लॉटरी प्रक्रिया में भाग नहीं लेने का फैसला किया, तब हम उन्हें अलग-थलग करने की दूसरी रणनीति अपनाएंगे। मुमकिन है कि हम लॉटरी प्रक्रिया से तय हुई सुनवाई में भी भाग लेने से इनकार कर दें।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट के संचार विशेषज्ञ किशोर पॉडेल ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘अभी तक इस बारे में कोई सूचना नहीं है कि चीफ जस्टिस लॉटरी प्रक्रिया में भाग लेंगे या नहीं।’ वकीलों ने चीफ जस्टिस पर घूस लेकर नियुक्ति करने, सरकार से सौदेबाजी करके अपने एक रिश्तेदार को शेर बहादुर देउबा सरकार में मंत्री बनवाने, कुछ सरकारी निर्णयों के खिलाफ दायर अर्जियों पर सुनवाई लटकाने आदि जैसे आरोप लगाए हैं। इन्ही वजहों से जस्टिस राणा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वकीलों के आंदोलन के कारण नेपाल में न्यायिक प्रक्रिया 18 नवंबर के बाद से अस्त-व्यस्त है।