एक तरफ जलवायु परिवर्तन को लेकर अमेरिका पेरिस समझौते से बाहर होने की औपचारिक घोषणा कर चुका है और दूसरी तरफ 153 देशों के 11 हजार से ज्यादा वैज्ञानिकों ने जलवायु आपातकाल का एलान कर दिया है। इन वैज्ञानिकों ने चेताया है कि यदि भूमंडल के संरक्षण के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए जाते हैं तो ‘अनकही पीड़ा’ सामने आएगी।
इस घोषणा पर हस्ताक्षर करने वाले दुनिया के 11 हजार वैज्ञानिकों ने जलवायु आपातकाल से निपटने के लिए छह सुझाव दिए हैं। इनमें जीवाश्म ईंधन की जगह उर्जा के अक्षय स्रोतों का इस्तेमाल, मीथेन गैस जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन रोकना, पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा, वनस्पति भोजन के इस्तेमाल व मांसाहार घटाना, कार्बन मुक्त अर्थव्यवस्था का विकास और जनसंख्या को कम करना शामिल है। उन्होंने सुझाव दिया कि पृथ्वी पर जीवन बनाए रखने के लिए हमें मानवीय कार्य करना होगा, क्योंकि हमारा एक ही घर है और वह सिर्फ पृथ्वी ही है।
वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए छह सुझावों में से एक मांसाहार छोड़ने की अपील भी है। वैज्ञानिकों ने दुनिया में लोगों से शाकाहार की तरफ बढ़ने का आग्रह करते हुए लोगों से ज्यादा से ज्यादा फल और सब्जी खाने को कहा है। इससे मीथेन और ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कमी आएगी। वैज्ञानिकों ने खाना भी कम से कम बर्बाद करने की अपील की है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब एक तिहाई खाना दुनिया में बर्बाद होता है।