इस्राइल हिजबुल्ला को पूरी तरह से खत्म करने के लिए लगातार हमला कर रहा है। इस बीच एक बड़ी चौंकाने वाली खबर सामने आई है। बताया जा रहा कि इस्राइल द्वारा हिजबुल्ला प्रमुख को मार गिराए जाने के बाद 100 और सैयद हसन नसरल्ला पैदा हो गए। इसे इस्राइल के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता।
दरअसल, इराक के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि हिजबुल्ला प्रमुख को लेबनान के बेरूत में इस्राइल द्वारा ढेर किए जाने के बाद से करीब सौ नवजात बच्चों का नाम नसरल्ला रखा गया है।
नई पीढ़ी के लोगों में प्रेरणा का जरिया बन रहा नसरल्ला
मंत्रालय ने इराक के विभिन्न क्षेत्रों में नसरल्ला नाम वाले 100 बच्चों के जन्मों का रजिस्ट्रेशन किया। इराक के कई स्थानीय मीडिया आउटलेट ने बुधवार को यह जानकारी दी। एक न्यूज चैनल ने कहा कि यह कदम ‘प्रतिरोध के शहीद के सम्मान में’ उठाया गया है। ऐसा लगता है कि नसरल्ला की मौत के बाद उसका नाम नई पीढ़ी के लोगों में प्रेरणा का जरिया बन रहा है, जिसे कहीं से भी अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता।
पिछले महीने इस्राइली सेना ने मार गिराया था
बीते 27 सितंबर को हिजबुल्ला का गढ़ माने जाने वाले बेरूत के दहियेह में इस्राइली सेना ने हमला कर नसरल्ला को मार गिराया था।इस्राइल ने इस हमले को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा। मगर, घटना के बाद नसरल्ला की लोकप्रियता और उसके प्रति सम्मान ने एक नया रूप ले लिया। यही कारण है कि अरब देशों के लोग अपने नवजात बच्चों का नाम 'नसरल्ला' रख रहे हैं।
क्या है नसरल्ला का मतलब?
अरब देशों में ‘नसरल्ला’ नाम अपनी एक खास अहमियत रखता है। इसका मतलब होता है ‘खुदा की जीत’। इसके साथ ही यह नाम संघर्ष और प्रतिरोध की भावना को भी जाहिर करता है। नसरल्ला की मौत के बाद तो यह नाम और भी तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है। उसकी मौत के बाद इराक में अब तक 100 से अधिक बच्चों का नाम 'नसरल्ला' रखा गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक नसरल्ला नाम रखने वाले माता-पिता इसे सिर्फ एक नाम नहीं मानते बल्कि यह उनके लिए साहस, प्रतिरोध और धार्मिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उनके अनुसार यह नाम हसन नसरल्ला के प्रति सम्मान प्रकट करने का उनका तरीका है। साथ ही वो ये भी मानते हैं कि इस नाम से उनके बच्चे नसरल्ला के विचारों और उसकी लीडरशिप से प्रभावित होंगे। ऐसा मालूम होता है कि अरब के कुछ देशों में अब यह नाम एक नए युग के लिए प्रतिरोध और संघर्ष की पहचान बनने की ओर आगे बढ़ रहा है।
कौन है नसरल्ला? जानें कैसे सत्ता तक पहुंचा
नसरल्ला का जन्म 1960 में बेरूत के उत्तरी उपनगर शारशाबूक में एक शिया परिवार में हुआ, उसके पिता किराना दुकानदार थे। नसरल्ला बाद में दक्षिणी लेबनान आ गया। उसने धर्मशास्त्र की पढ़ाई की और अमल आंदोलन में शामिल हो गया। वह 15 साल की उम्र में कुछ समय के लिए अमल संगठन में शामिल हो गया जो हिजबुल्ला के बनने से पहले शिया राजनीतिक और अर्धसैनिक संगठन था। उसके बाद नसरल्ला इराक के नजफ में एक मदरसा में पढ़ने चला गया, जहां से उसे 1978 में सद्दाम हुसैन की सत्ता ने अन्य लेबनानी छात्रों के साथ निष्कासित कर दिया गया। 1982 में हिजबुल्लाह में शामिल हुआ। ऐसा माना जाता है कि हिजबुल्ला को पश्चिम एशिया में एक शक्तिशाली अर्धसैनिक एवं राजनीतिक ताकत में तब्दील करने में 64 वर्षीय हसन नसरल्ला की बड़ी भूमिका थी। नसरल्ला ने 2006 में इस्राइल के खिलाफ हिजबुल्ला के युद्ध की अगुवाई की थी। उसी के नेतृत्व में समूह पड़ोसी देश सीरिया के क्रूर संघर्ष में शामिल हुआ था।