हिमाचल प्रदेश में बिजली परियोजनाएं स्थापित करने वाले उत्पादकों को 15 अगस्त के बाद वाटर सेस के बिल जारी होंगे। प्रदेश सरकार ने वाटर सेस आयोग गठित होने के बाद ही बिल जारी करने का फैसला लिया है। आयोग के अध्यक्ष सहित चार सदस्यों की नियुक्ति को आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। अध्यक्ष पद के जल शक्ति विभाग के सचिव अमिताभ अवस्थी, पर्यटन निदेशक अमित कश्यप और सेवानिवृत्त जल शक्ति सचिव विकास लाबरू ने भी आवेदन किया है।
अध्यक्ष और सदस्यों के लिए अभी तक 43 आवेदन हो चुके हैं। चयन के लिए राज्य सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सर्च कमेटी गठित की है। प्रदेश के 172 ऊर्जा उत्पादकों में से 127 वाटर सेस के मामले में सरकार के पास पंजीकरण करवा चुके हैं। भारत सरकार के कुछ उपक्रमों सहित अन्य ऊर्जा उत्पादकों ने वाटर सेस देने से इनकार किया है। 16 अगस्त को इस मामले की हाईकोर्ट में सुनवाई है।
कुछ ऊर्जा उत्पादक वाटर सेस के खिलाफ हाईकोर्ट गए हैं। सरकार इस सुनवाई में होने वाले फैसले का इंतजार कर रही है। इसी बीच आयोग के गठन की औपचारिकताएं भी पूरी हो जांएगी। वाटर सेस आयोग जल उपकर से संबंधित तमाम अपीलों की सुनवाई करेगा। राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश जलविद्युत उत्पादन पर जल उपकर राज्य आयोग अध्यक्ष और सदस्यों का वेतन, भत्ते और सेवा की अन्य शर्तें नियम -2023 बनाए हैं। आयोग के अध्यक्ष और सदस्य अपना कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के समक्ष पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे।
अगर कोई सरकारी अधिकारी अध्यक्ष या सदस्य के रूप में नियुक्त होता है तो वह अपने निर्धारित वेतनमान और भत्तों का लाभ लेगा। अगर अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुका है तो उन्हें अंतिम वेतनमान के बराबर लाभ मिलेगा। पेंशन और भत्ते इससे माइनस किए जाएंगे। अन्य भत्ते जैसे यात्रा, परिवहन, मेडिकल उपचार, टेलीफोन सुविधा आदि भी ग्रुप ए अधिकारी के बराबर दिए जाएंगे। अगर अध्यक्ष या सदस्य के पास पहले से ही सरकारी आवास है तो वह इसे अपने पास बनाए रख सकेंगे या फिर एचआरए मिलेगा।