भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के बीच क्या एक नई बर्फीली दीवार खड़ी होने वाली है? क्या ढाका और दिल्ली के बीच वर्षों से जमी दोस्ती की नींव अब डगमगाने लगी है? जी हां, क्योंकि मामला अब सिर्फ शेख हसीना के भारत में रहने भर का नहीं रहा, बल्कि उनके एक भाषण ने पड़ोसी देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत पर सीधा आरोप लगाया है कि आखिर एक भगोड़ी नेता को अपनी ज़मीन से जहर उगलने की इजाज़त क्यों दी जा रही है। आज हम उस बड़े विवाद की बात करेंगे जिसने दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है जहाँ से वापसी का रास्ता फिलहाल धुंधला नज़र आ रहा है। यह मामला क्या है, शेख हसीना ने ऐसा क्या कहा जिससे यूनुस सरकार हिल गई और भारत इस पूरे खेल में कहाँ खड़ा है, आइए विस्तार से समझते हैं
बांग्लादेश ने रविवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में सार्वजनिक सभा को संबोधित करने की अनुमति दिए जाने पर चिंता जताई। अंतरिम सरकार ने कहा कि हसीना के बयान आम चुनाव से पहले देश की राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। बात शुरू होती है इस रविवार से, जब बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने एक बहुत ही कड़ा और हैरान कर देने वाला बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि बांग्लादेश सरकार इस बात से बेहद आहत है कि शेख हसीना ने भारत की राजधानी नई दिल्ली में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित किया। बांग्लादेश का मानना है कि हसीना की ये टिप्पणियां न केवल उनके देश की राजनीतिक स्थिरता को बिगाड़ सकती हैं, बल्कि आने वाले आम चुनावों पर भी बुरा असर डाल सकती हैं। अब बांग्लादेश ने शेख हसीना को भारत में सार्वजनिक सभा को संबोधित करने की अनुमति दिए जाने पर चिंता जताई और कहा कि उनके बयान देश की राजनीतिक स्थिरता के लिए खतरा हैं।