नेपाल की राजनीति में नैतिकता बनाम सत्ता की बहस एक बार फिर तेज हो गई है एक बड़े फैसले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब जवाबदेही की नई परंपरा स्थापित हो रही है? आखिर ऐसा क्या हुआ की नेपाल के गृह मंत्री सुधन गुरुङ ने पदभार संभालने के महज 26 दिन बाद ही गृह मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया है? आखिर किस विवाद से जुड़ा है उनका नाम? आइए जानते हैं इन तमाम सवालों के जावब। आपको बात दें की दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर बारूद की गंध फैल गई है। बुधवार को ईरानी सेना ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बादल और गहरे हो गए हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और इस्राइल के साथ ईरान की शांति वार्ता को लेकर प्रयास किए जा रहे थे।
दरअसल, नेपाल की सियासत में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां देश के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह फैसला नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए और अपने वित्तीय निवेशों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए किया है। गुरुंग ने फेसबुक पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की घोषणा की, जिसमें उन्होंने सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और ईमानदारी को सर्वोच्च बताया।
अपने पोस्ट में गुरुंग ने लिखा कि उन्होंने 2082 चैत्र 13 से गृह मंत्री के रूप में ईमानदारी से काम किया, लेकिन हाल के दिनों में उनके शेयरों और संपत्तियों को लेकर कई सवाल उठे। उन्होंने कहा कि जनता की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और किसी भी पद से बढ़कर नैतिकता का महत्व होता है। उनके मुताबिक, जनता का विश्वास ही किसी भी नेता की सबसे बड़ी पूंजी है।
गुरुंग ने अपने इस्तीफे में ‘जेन जेड’ यानी नई पीढ़ी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज के युवा पारदर्शिता, सुशासन और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं और नेताओं को इस कसौटी पर खरा उतरना ही होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पद पर बने रहने से हितों का टकराव हो सकता था, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए पद छोड़ना जरूरी था।
उन्होंने अपने बयान में उन 46 लोगों के बलिदान को भी याद किया, जिनके संघर्ष से वर्तमान सरकार का गठन हुआ। गुरुंग के मुताबिक, जब सरकार पर सवाल उठते हैं, तो उसका जवाब नैतिकता के जरिए ही दिया जाना चाहिए। उन्होंने मीडिया, युवाओं और आम नागरिकों से अपील की कि वे ईमानदारी के रास्ते पर चलें और बदलाव के लिए आत्म-शुद्धि को अपनाएं।
हालांकि, अपने बयान में उन्होंने मीडिया के एक वर्ग पर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ मीडियाकर्मियों के ‘पसंदीदा शेयरों’ की जानकारी भी समय आने पर सामने आएगी। इसके जरिए उन्होंने संकेत दिया कि केवल नेताओं ही नहीं, बल्कि अन्य संस्थाओं की जवाबदेही भी जरूरी है।
नेपाल की राजनीति में यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब हाल ही में एक और मंत्री पर सख्त कार्रवाई की गई थी। 9 अप्रैल को प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार शाह को पद से बर्खास्त कर दिया था। उन पर पद के दुरुपयोग और अनुशासनहीनता के आरोप लगे थे। जांच में पाया गया कि उन्होंने अपनी पत्नी को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड में बनाए रखने के लिए अपने पद का गलत इस्तेमाल किया।
इस तरह लगातार दो बड़े घटनाक्रम नेपाल की राजनीति में जवाबदेही और नैतिकता के बढ़ते दबाव को दिखाते हैं। जहां एक ओर एक मंत्री ने खुद इस्तीफा देकर जांच का रास्ता साफ किया, वहीं दूसरी ओर सरकार ने आरोपों के आधार पर कड़ी कार्रवाई की।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाएं नेपाल की राजनीति में एक नए ट्रेंड की ओर इशारा कर रही हैं, जहां नेताओं पर जनता और संस्थाओं का दबाव बढ़ रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि सुदन गुरुंग के इस्तीफे के बाद जांच किस दिशा में जाती है और क्या इससे राजनीतिक पारदर्शिता को और मजबूती मिलती है।