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Rudraprayag: जिले में क्या है प्राकृतिक नौला, धारों का हाल, अब जमीन में उतरकर लगाया जाएगा पता

जनपद में स्थित प्राकृतिक नौला, पंदेरा, धारों का क्या हाल है इसको लेकर जल्द डाटा तैयार किया जाएगा। पटवारी व अन्य फील्ड अधिकारियों की मदद से मौके पर ही ऐप के माध्यम से डाटा संकलित किया जाएगा। बीते कुछ सालों में राज्यभर में ऐसे कई प्राकृतिक स्रोत थे जो अब पूरी तरह सूख चुके हैं। खासकर पहाड़ी जिलों में ग्रामीण इन्हीं स्रोतों पर निर्भर थे, ऐसे में राज्य द्वारा सूखते प्राकृतिक जलधाराओं का हाल जानने के लिए यह डेटा संकलित किया जा रहा है। इसी को लेकर बृहस्पतिवार को विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में लघु सिंचाई विभाग द्वारा आयोजित सातवीं लघु सिंचाई, द्वितीय जल निकाय, प्रथम वृहद एवं मध्यम सिंचाई तथा प्रथम स्प्रिंग जनगणना के संबंध में एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बताया गया कि संगणना का उद्देश्य जिले में उपलब्ध लघु, मध्यम एवं वृहद सिंचाई संरचनाओं, विभिन्न जल निकायों तथा प्राकृतिक जल स्रोतों का सटीक, अद्यतन एवं विश्वसनीय डाटा तैयार किया जाना है। लघु सिंचाई के अधिशासी अभियंता मोहन लिए आर्य ने कहा कि संगणना कार्य शासन की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिससे जिले में उपलब्ध जल संसाधनों की वास्तविक स्थिति सामने आती है। उन्होंने कहा कि इससे जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार तथा कृषि विकास से जुड़ी योजनाओं का सशक्तिकरण होगा। कार्यशाला मास्टर ट्रैनर राहुल शर्मा ने कहा कि स्प्रिंग संगणना से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर सूखते जलस्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। सातवीं लघु सिंचाई संगणना, कृषि क्षेत्र में जल उपयोग, सिंचाई क्षमता, जल उपलब्धता एवं भविष्य के संसाधन प्रबंधन का सटीक आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी है, इन पर कार्य करने में आसानी होगी।

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