तुमुल कोलाहल कलह में मैं हृदय की बात रे सुन... महाकवि जयशंकर प्रसाद की यह कविता हिंदी के गढ़ में जीवंत हो उठी। ढाई दशक के बाद 131 साल पुरानी संस्था नागरी प्रचारिणी सभा के नवीन सत्र की संंगीतमयी शुरुआत हुई।
24 October 2026
23 October 2026
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