मां गंगा निषादराज सेवा न्यास ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आजादी तक में निषाद समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन आज भी इस समाज के लोगों को हाशिए पर धकेला जा रहा है। न्यास द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि गंगा नदी में नाव संचालन को पुलिस-प्रशासन ने प्रतिबंधित कर दिया है। वहीं, सरकारी क्रूज बिना रोक टोक के चल रही है। जिसकी वजह से हजारों परिवार बेरोजगारी और भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। संस्था का कहना है कि निषाद समाज का जीवन पूरी तरह से नाव संचालन और गंगा से जुड़ा हुआ है, लेकिन प्रशासन द्वारा अचानक नाव संचालन पर रोक लगा देने से बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, दवा और पेट पालन तक का संकट खड़ा हो गया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि विदेशी कंपनियों और पर्यटन व्यवसायियों को लाभ पहुंचाने के लिए स्थानीय नाविकों का रोजगार छीना जा रहा है। संस्था ने चेतावनी दी है कि अगर नाव संचालन पर लगे प्रतिबंध को तुरंत नहीं हटाया गया तो समाज आंदोलन के लिए बाध्य होगा। लगभग 200 नाविकों ने एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर संस्था के संरक्षक संतोष साहनी, संगठन मंत्री शंभू साहनी, कोषाध्यक्ष बाबू साहनी और मंत्री विनोद साहनी समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।