रबी-उल-अव्वल की पहली नौचंदी पर अलम का जुलूस निकाले गए। नौहा मातम के साथ दुआख्वानी की गई। दरगाह ए फातमान में दिन में 12:00 बजे मौला अली के रौजै से अजादारों ने जुलूस निकाला। जुलूस बीबी फातिमा मौला हुसैन के रौजे से होता हुआ हजरत अब्बास के रौजे पर पहुंचा। जुलूस के पहुंचने पर शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी सैयद फरमान हैदर ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा रबी-उल-अव्वल वह महीना है जिसमें आखिरी रसूल हजरत मोहम्मद मुस्तफा का जन्म हुआ। उनके छठें जानशीन इमाम जाफर सादिक का भी जन्मदिन है और आठवें इमाम की शहादत का भी दिन है। हमें अपना जीवन वैसे ही व्यतीत करना चाहिए जिस तरह से अल्लाह के रसूल और इमाम ने बताया है। इस्लाम किरदार का नाम है जिसकी बेहतरीन मिसाल हजरत मोहम्मद मुस्तफा के नवासे इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में पेश की। वह आज सारी दुनिया के लिए एक इबरत है।