जिले में व्याप्त प्रदूषण की समस्या और उस पर प्रभावी नियंंत्रण के लिए पर्यावरण दिवस पर सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी के संयोजक रामेश्वर प्रसाद की अगुवाई में ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर आवाज उठाई। प्रदर्शन करते हुए एडीएम को डीएम को संबोधित ज्ञापन सौंपा। एम्स भोपाल की हालिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदूषण का सीधा असर बच्चों के विकास पर पड़ रहा है। साथ ही लोगों के फेफड़े की क्षमता भी तेजी से घट रही है। रेणुका नदी में राख भराव-जलधारा से छेड़छाड़ का जिक्र करते हुए कहा कि लगातार मनमानी से रेणुका नदी कराह रही है। इसके पुनर्जीवन के लिए ठोस प्रयास किए जाएं। साथ ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई। प्रधान दिनेश और मनोज कुमार का कहना था कि म्योरपुर, चोपन, बभनी, कोन, दुद्धी ब्लाॅक के 300 से अधिक गांव गंभीर रूप से प्रदूषण की चपेट में हैं। वायु जल से प्रभावित है। वर्ष 2012 मे 52 गांवों के 21 हजार व्यक्तियों की जांच की गई थी। इससे जहां यह स्पष्ट हुआ कि लगभग प्रत्येक व्यक्ति के फेफड़े की क्षमता 40 से 42 प्रतिशत घट गई है। उमेश चौबे ,रमेश यादव ने कहा कि एम्स भोपाल के शोध में भी सामने आया है कि प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र के 14 प्रतिशत लोगों में दमे के लक्षण हैं। गर्भपात में 56 फीसद बढ़ोत्तरी का दावा किया गया। एम्स की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि ताजा शोध में प्रदूषण के चलते एक से पांच के बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होने की पुष्टि हुई है। कृष्णा, बेचन, अधिक विश्वनाथ, शिव शरण, मान सिंह,बेचू,हीरा मति, प्रेम कुमारी, पार्वती, विशंभर खरवार,अशोक सिंह, प्रशांत दुबे, राजेंद्र, बलवंत खरवार आदि का कहना था कि एक सामान्य बच्चे को 17 माह में बगैर सहारे के चलना शुरू कर देना लेकिन सोनभद्र के प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र में 55 से 70 फीसद बच्चे ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। उनके बोलने, देखने, पहचानने, सीखने की क्षमता पर भी असर पड़ने का दावा किया गया है। दावा किया गया कि रेणुका नदी के साथ डोंगिया नाला, बेलवादह ऐश पांड, बलिया नाला शक्तिनगर की भी स्थिति खराब है। यहां स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और जिम्मेदारों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।